भारत में छह यूक्रेनी नागरिकों की हिरासत ने साल 2026 में भारत और यूक्रेन के बीच एक नए कूटनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इन नागरिकों को मिज़ोरम में बिना अनुमति प्रवेश करने और कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है। यूक्रेन ने इन गिरफ्तारियों को ‘रूसी पक्ष की ओर से दी गई सूचना’ पर आधारित एक सुनियोजित और राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया है, जबकि भारत ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया है। इस संवेदनशील मामले ने अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया है और दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है।
मुख्य बिंदु
- छह यूक्रेनी नागरिकों को 16 मार्च 2026 को मिज़ोरम में अवैध प्रवेश और गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में हिरासत में लिया गया।
- यूक्रेन ने हिरासत को ‘रूसी पक्ष की जानकारी’ पर आधारित एक ‘राजनीति से प्रेरित’ कदम बताया और भारत के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया।
- भारत के विदेश मंत्रालय ने परमिट की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि अदालत इस मामले में फैसला करेगी।
- यूक्रेन ने किसी भी ‘आतंकवादी गतिविधि’ में शामिल होने के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए तत्काल कॉन्सुलर पहुंच और नागरिकों की रिहाई की मांग की।
क्या है यह पूरा मामला और भारत का रुख?
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, छह यूक्रेनी नागरिकों को मिज़ोरम में बिना अनुमति प्रवेश करने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन सभी को 16 मार्च 2026 को पटियाला हाउस कोर्ट में एनआईए अदालत में पेश किया गया, जहाँ उन्हें 27 मार्च तक हिरासत में भेज दिया गया। यह घटना भारत-म्यांमार सीमा के संवेदनशील क्षेत्र में हुई है, जहाँ विशेष परमिट की आवश्यकता होती है।

भारत के विदेश मंत्रालय की टिप्पणी
19 मार्च 2026 को भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन इलाकों में जाने के लिए परमिट लेना जरूरी होता है। जायसवाल ने कहा, “उनके (यूक्रेनी नागरिकों) पास यह विशेष अनुमति थी या नहीं, इसका फैसला अब अदालत करेगी। अदालत में ये मामला पेश किया जाएगा तभी सच्चाई सामने आएगी।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर इस मामले में एनआईए कोई बयान जारी करे तो उस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। जायसवाल ने संकेत दिया कि उनकी समझ के अनुसार, इन नागरिकों के पास उस इलाके में यात्रा करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज नहीं थे। यह दर्शाता है कि भारत सरकार इस मामले को एक कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे के रूप में देख रही है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
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यूक्रेन का कड़ा विरोध और आतंकवाद पर बयान
यूक्रेन ने अपने नागरिकों की हिरासत पर कड़ा विरोध जताया है। यूक्रेन के दूतावास ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जारी एक प्रेस रिलीज में कहा है कि इन लोगों को हिरासत में लिए जाने की कार्यवाही ‘रूसी पक्ष की ओर से दी गई सूचना के आधार पर हुई है।’ दूतावास ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है, खासकर मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए, जो यह संकेत देती हैं कि यह मामला सुनियोजित और राजनीति से प्रेरित है।
आतंकवाद के आरोपों का खंडन
यूक्रेनी दूतावास ने अपनी प्रेस रिलीज में स्पष्ट किया है कि यूक्रेन किसी भी ‘आतंकवादी गतिविधि’ में शामिल होने के लिए दिए जाने वाले बढ़ावा को पूरी तरह खारिज करता है। यूक्रेन ने तर्क दिया कि वह हर दिन रूस के ‘आतंक’ का नतीजा भुगत रहा है, और यही वजह है कि सैद्धांतिक तौर पर वह हर तरह के ‘आतंकवाद’ के खिलाफ बिना किसी समझौते के लड़ने का पक्षधर है। यह बयान उन आरोपों का सीधे तौर पर जवाब देता है, जो गैरकानूनी गतिविधियों के संदर्भ में लगाए गए हैं।
कॉन्सुलर पहुंच और मीडिया पर आरोप
यूक्रेन ने इस मामले में तत्काल और बिना बाधा कॉन्सुलर पहुंच की मांग की है। यूक्रेन की समाचार एजेंसी यूकेआरइन्फ़ॉर्म ने विदेश मंत्रालय के हवाले से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के उलट, भारत में यूक्रेन के दूतावास को इन नागरिकों की हिरासत के बारे में भारतीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। यह एक गंभीर कूटनीतिक चूक मानी जाती है।
पीटीआई के मुताबिक, यूक्रेन के राजदूत पोलिशचुक ने सिबी जॉर्ज से मुलाकात के दौरान एक आधिकारिक विरोध-पत्र भी सौंपा, जिसमें यूक्रेनी नागरिकों की तत्काल रिहाई और उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की गई। हालांकि, 16 मार्च को हुई सुनवाई में दूतावास के प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन उन्हें हिरासत में लिए गए लोगों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
भारतीय और रूसी मीडिया पर आरोप
यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि कुछ भारतीय और रूसी मीडिया संस्थान इस मामले को लेकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। यूकेआरइन्फ़ॉर्म ने विदेश मंत्रालय के हवाले से यह भी कहा कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि ये नागरिक भारत या म्यांमार में किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल थे। यूक्रेन के अनुसार, इन छह नागरिकों को कानूनी सहायता और वकील उपलब्ध कराया गया है।
यह मामला भारत और यूक्रेन के बीच एक संवेदनशील मोड़ पर आया है, और इसकी सुनवाई 27 मार्च 2026 तक जारी रहेगी। इस पर वैश्विक कूटनीति की भी निगाहें टिकी हुई हैं। भारत के विदेश मंत्रालय को भी इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट रखनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
यूक्रेनी नागरिकों को भारत में क्यों हिरासत में लिया गया?
इन छह यूक्रेनी नागरिकों को मिज़ोरम में बिना अनुमति प्रवेश करने और कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में लिया गया है।
यूक्रेन ने इस हिरासत पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
यूक्रेन ने हिरासत को ‘रूसी पक्ष की ओर से दी गई सूचना’ पर आधारित एक सुनियोजित और राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया है। उसने इस पर कड़ा विरोध जताया है और तत्काल रिहाई की मांग की है।
भारत के विदेश मंत्रालय का इस मामले पर क्या कहना है?
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि उन इलाकों में जाने के लिए परमिट लेना जरूरी होता है और इस मामले का फैसला अदालत करेगी। उन्होंने एनआईए की भूमिका का भी उल्लेख किया।
क्या यूक्रेन ने आतंकवाद से संबंधित आरोपों को स्वीकार किया है?
नहीं, यूक्रेन ने किसी भी ‘आतंकवादी गतिविधि’ में शामिल होने के आरोप को सिरे से खारिज किया है। उसने कहा कि वह सैद्धांतिक तौर पर हर तरह के ‘आतंकवाद’ के खिलाफ है।
यूक्रेनी दूतावास को क्या कॉन्सुलर पहुंच मिली है?
यूक्रेन का आरोप है कि भारतीय अधिकारियों की ओर से दूतावास को हिरासत के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई। सुनवाई के दौरान दूतावास के प्रतिनिधि मौजूद थे, लेकिन उन्हें हिरासत में लिए गए लोगों से सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
अदालत ने इन यूक्रेनी नागरिकों को 27 मार्च 2026 तक हिरासत में भेज दिया है, जिसके बाद अगली सुनवाई होने की संभावना है।