आसमान में एक अद्भुत और दुर्लभ नजारा दिखने वाला है! खगोलविदों की नजरें इन दिनों एक खास मेहमान पर टिकी हैं – धूमकेतु C/2026 A1 MAPS. यह नया धूमकेतु तेजी से सूरज की ओर बढ़ रहा है और 4 अप्रैल 2026 को यह अपने सफर के सबसे खतरनाक पड़ाव पर होगा. क्या यह ‘मौत का धूमकेतु’ सूरज की भीषण गर्मी और रेडिएशन को झेल पाएगा? आइए जानते हैं इस रोमांचक खगोलीय घटना के बारे में.
मुख्य बिंदु
- धूमकेतु C/2026 A1 MAPS को जनवरी 2026 में खोजा गया.
- 4 अप्रैल 2026 को यह सूरज की सतह से महज 1,60,000 किलोमीटर ऊपर होगा.
- यह सौर कोरोना में प्रवेश करेगा, जहाँ तापमान लाखों डिग्री तक होता है.
- इसे ‘सनग्रेजिंग‘ श्रेणी का धूमकेतु माना जाता है, जिसके बचने की संभावना कम होती है.
- नासा और ईएसए का सोहो सैटेलाइट इस पर लगातार नजर रख रहा है.
धूमकेतु C/2026 A1 MAPS: सूरज की ओर खतरनाक यात्रा
जनवरी 2026 में खोजा गया धूमकेतु C/2026 A1 MAPS, जिसे चिली के अटाकामा रेगिस्तान में टेलीस्कोप के जरिए पहली बार देखा गया था, अब तक के सबसे रोमांचक खगोलीय पिंडों में से एक बन गया है. इसे ‘सनग्रेजिंग‘ धूमकेतु कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि यह सूरज के बेहद करीब से गुजरने वाला है.

4 अप्रैल 2026 को यह पेरिहेलियन (सूर्य के निकटतम बिंदु) पर पहुंचेगा. उस दिन यह सूरज की सतह से सिर्फ 1,60,000 किलोमीटर ऊपर होगा, जो अंतरिक्ष के हिसाब से बेहद कम दूरी है.
लाखों डिग्री तापमान, गुरुत्वाकर्षण का तनाव: क्या बचेगा यह धूमकेतु?
धूमकेतु C/2026 A1 MAPS, 4 अप्रैल 2026 को सौर कोरोना में प्रवेश करेगा. यह वह क्षेत्र है जहाँ तापमान लाखों डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है.
इतनी भीषण गर्मी और सूरज के जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण के कारण पैदा होने वाला तनाव किसी भी धूमकेतु के लिए बहुत खतरनाक होता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादातर ‘सनग्रेजिंग‘ धूमकेतु इस चरण में पूरी तरह से नष्ट हो जाते हैं. इसकी चमक और अस्तित्व इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सूरज के कहर से कितना बच पाता है.
किसने खोजा ‘MAPS’ धूमकेतु और क्या है इसका इतिहास?
नामकरण और प्रारंभिक खोज
इस धूमकेतु का नाम ‘MAPS’ इसके चार खोजकर्ताओं – एलेन मौरी, जॉर्जेस अटार्ड, डैनियल पैरट और फ्लोरियन सिग्नोरिट के उपनामों के पहले अक्षर से बना है. 13 जनवरी 2026 को जब इसे पहली बार देखा गया था, तब यह सूरज से लगभग 307 मिलियन किलोमीटर दूर था.
क्रूट्ज़ समूह का रहस्य
धूमकेतु C/2026 A1 MAPS, ‘क्रूट्ज़ समूह’ का एक हिस्सा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह समूह 362 ईसा पूर्व देखे गए एक विशाल धूमकेतु के टूटने से बना है. इतिहास में 1843 और 1882 के ‘महान धूमकेतु’ और 1965 का प्रसिद्ध ‘इकेया-सेकी’ भी इसी समूह का हिस्सा थे. क्रूट्ज़ समूह के धूमकेतु अपनी असाधारण चमक के लिए जाने जाते हैं, लेकिन सूरज के करीब जाने पर उनके जीवित बचने की संभावना बहुत कम होती है.
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क्या आप अपनी आँखों से देख पाएंगे यह अद्भुत नजारा?
धूमकेतु C/2026 A1 MAPS की दृश्यता को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. मार्च के अंत तक इसकी चमक +10 मैग्नीट्यूड तक पहुंच सकती है, जिससे इसे छोटे टेलीस्कोप से देखा जा सकेगा. यह वर्तमान में नक्षत्र फोर्नैक्स, एरिडानस, सेटस और मीन की ओर बढ़ रहा है.
दक्षिणी गोलार्ध के लोगों के लिए इसे देखना आसान होगा, जबकि उत्तर भारत जैसे क्षेत्रों में यह क्षितिज के काफी नीचे रहेगा. अगर यह 4 अप्रैल के बाद सूरज के पास से बचकर निकलता है, तो यह शाम के आकाश में अचानक बहुत तेज चमक के साथ दिखाई दे सकता है. इसकी वास्तविक चमक इस बात पर निर्भर करेगी कि सूरज की गर्मी ने इसे कितना नुकसान पहुंचाया है.
नासा और ईएसए की पैनी नजर: सोहो सैटेलाइट करेगा ट्रैक
सूरज के बहुत करीब होने के कारण धूमकेतु C/2026 A1 MAPS को जमीन से देखना बेहद मुश्किल होगा. ऐसे में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ईएसए (ESA) का संयुक्त ‘सोहो‘ (SOHO) सैटेलाइट इसे ट्रैक करेगा.
2 अप्रैल को यह सोहो के LASCO C3 कैमरे में नजर आने लगेगा और 4 अप्रैल को जब यह सूरज के सबसे करीब होगा, तब सोहो महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा. वैज्ञानिक इस डेटा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि पता चल सके कि यह धूमकेतु बचा है या नहीं. इस घटना पर अधिक जानकारी के लिए आप यूनिवर्स टुडे की रिपोर्ट भी देख सकते हैं.
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निष्कर्ष
धूमकेतु C/2026 A1 MAPS की सूरज की ओर यह यात्रा रोमांच और अनिश्चितता से भरी है. चाहे यह बच पाए या नहीं, यह खगोल प्रेमियों और वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण घटना होगी. 4 अप्रैल 2026 को पूरी दुनिया की नजरें इस अद्भुत खगोलीय नजारे पर टिकी होंगी, यह जानने के लिए कि क्या यह ‘मौत का धूमकेतु’ सूरज के ‘चुंबन’ से बच पाएगा या नहीं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: धूमकेतु C/2026 A1 MAPS क्या है?
उत्तर: धूमकेतु C/2026 A1 MAPS एक नया खोजा गया ‘सनग्रेजिंग’ धूमकेतु है जो तेजी से सूरज की ओर बढ़ रहा है और 4 अप्रैल 2026 को इसके सबसे करीब पहुंचेगा.
प्रश्न 2: यह धूमकेतु सूरज के कितने करीब से गुजरेगा?
उत्तर: 4 अप्रैल 2026 को यह सूरज की सतह से महज 1,60,000 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा, जो अंतरिक्ष के हिसाब से बहुत कम दूरी है.
प्रश्न 3: क्या यह धूमकेतु सूरज की गर्मी झेल पाएगा?
उत्तर: इसकी संभावना कम है. यह सौर कोरोना में प्रवेश करेगा, जहाँ तापमान लाखों डिग्री तक होता है. अधिकांश ‘सनग्रेजिंग’ धूमकेतु इस चरण में नष्ट हो जाते हैं.
प्रश्न 4: क्या हम इसे अपनी आँखों से देख पाएंगे?
उत्तर: मार्च के अंत तक इसे छोटे टेलीस्कोप से देखा जा सकता है. अगर यह सूरज के पास से बच निकला, तो 4 अप्रैल के बाद यह शाम के आकाश में बहुत तेज चमक के साथ दिखाई दे सकता है, खासकर दक्षिणी गोलार्ध में.
प्रश्न 5: कौन सी एजेंसियां इस धूमकेतु पर नजर रख रही हैं?
उत्तर: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी ईएसए (ESA) का संयुक्त ‘सोहो’ (SOHO) सैटेलाइट इस धूमकेतु पर लगातार नजर रख रहा है और महत्वपूर्ण डेटा जुटाएगा.
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