6 साल बाद भी दर्द! एनल कैंसर से जूझ रही महिला की दर्दनाक सच्चाई 2026

यह 2026 की बात है, और आज भी लाखों लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। एनल कैंसर एक ऐसा ही दुर्लभ लेकिन गंभीर प्रकार का कैंसर है, जिसके बारे में खुलकर बात करने से लोग अक्सर कतराते हैं। हाल ही में, उत्तरी आयरलैंड की 57 वर्षीय ट्रिश प्रॉसर ने अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की, जिसने कैंसर के इलाज के बाद होने वाली असहनीय पीड़ा और सामाजिक चुनौतियों की एक ऐसी सच्चाई उजागर की है, जो हम सभी को जाननी चाहिए।

मुख्य बिंदु

  • एनल कैंसर से पीड़ित ट्रिश प्रॉसर की 6 साल बाद भी दर्दनाक पीड़ा जारी है।
  • पेल्विक रेडियोथेरेपी के कारण वजाइनल स्टेनोसिस जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
  • समाज में एनल कैंसर को लेकर जुड़े कलंक (stigma) के कारण जागरूकता की कमी है।
  • इस दुर्लभ कैंसर के इलाज के बाद लंबी अवधि की देखभाल बहुत ज़रूरी है।

6 साल बाद भी असहनीय दर्द: ट्रिश प्रॉसर की आपबीती

ट्रिश प्रॉसर चार बच्चों की माँ हैं, जिन्हें 2020 में कोरोना महामारी के चरम पर एनल कैंसर का पता चला था। उन्होंने बताया कि पेल्विक रेडियोथेरेपी के बाद से वे लगातार असहनीय दर्द में हैं, और इलाज के छह साल बाद भी उनकी पीड़ा कम नहीं हुई है। ट्रिश ने महसूस किया कि इस दौरान उन्हें कई बार लगा कि वे मरने वाली हैं। उनकी वजाइनल वॉल्स सिकुड़ गईं, जिसे चिकित्सीय भाषा में रेडिएशन-इंड्यूस्ड वेजाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है।

एनल कैंसर

ट्रिश ने यह भी साझा किया कि उन्हें अपने प्रियजनों को अपने कैंसर के प्रकार के बारे में बताने में बहुत शर्म महसूस होती थी। उन्हें लगता था कि एनल कैंसर को लेकर समाज में एक बड़ा कलंक जुड़ा हुआ है।

बाहर से सामान्य दिखने के बावजूद, ट्रिश अंदर से टूट चुकी थीं। उनका सबसे बुरा लक्षण अत्यधिक थकान था और एनल के आसपास खुजली भी होती थी, हालांकि उनके बाउल मूवमेंट में कोई खास बदलाव नहीं आया था।

एनल कैंसर की दुर्लभता और समाज का मौन

एनल कैंसर ब्रिटेन में एक दुर्लभ बीमारी है, जहाँ हर साल लगभग 1,500 मामले सामने आते हैं। उत्तरी आयरलैंड में यह संख्या 40-50 के आसपास है। ट्रिश जैसे कई लोग अपने गुप्तांगों से जुड़ी समस्याओं के बारे में बात करने से हिचकिचाते हैं, जिससे जागरूकता और समय पर इलाज में बाधा आती है।

ट्रिश इस सामाजिक वर्जना (taboo) को तोड़ना चाहती हैं ताकि अन्य लोग अपनी समस्याओं के बारे में खुलकर बात कर सकें और सही समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।

एनल कैंसर क्या है और इसके जोखिम कारक

मुख्य रूप से, एनल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के उच्च जोखिम वाले स्ट्रेन के लगातार संक्रमण के कारण होता है। लगभग 90% मामलों के लिए एचपीवी ही जिम्मेदार है। यह वायरस एनल कैनाल में कोशिकाओं को असामान्य रूप से बढ़ने और ट्यूमर बनाने का कारण बनता है।

अन्य महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली या अन्य स्त्री रोग संबंधी कैंसर का इतिहास शामिल है। हालांकि, यह भी सच है कि एचपीवी से संक्रमित बहुत कम लोगों को ही कैंसर होता है। एचपीवी वैक्सीन लगवाकर आप इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। आप एचपीवी के बारे में अधिक जानकारी विकिपीडिया पर प्राप्त कर सकते हैं।

पेल्विक रेडियोथेरेपी के बाद की चुनौतियाँ और इंटिमेसी पर प्रभाव

एनल कैंसर के लिए पेल्विक रेडियोथेरेपी से वजाइना टिश्यू को लंबे समय तक नुकसान पहुँच सकता है। इस स्थिति को अक्सर रेडिएशन-इंड्यूस्ड वेजाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसमें ऐसे टिश्यू बन जाते हैं जिनसे वजाइना छोटी और शुष्क हो जाती है। जिसकी वजह से टिश्यू में कट लग सकते हैं और नुकसान भी पहुँच सकता है।

ट्रिश ने बताया, “मुझे नहीं पता था कि मेरी वजाइना वास्तव में आपस में चिपक गई थी और मुझे इसे फिर से ओपन करने की ज़रूरत थी। जो कि डाइलेटर (dilator) या शारीरिक संबंध के माध्यम से ही संभव था। शारीरिक संबंध दर्दनाक थे।”

उन्होंने यह भी कहा कि सौभाग्य से उनके पास एक मजबूत और प्यार करने वाला साथी था, जिसने इस मुश्किल दौर में उनका साथ दिया। इलाज के बाद शारीरिक संबंध बनाना भी एक रिकवरी का हिस्सा होता है, जिसके लिए धैर्य और समझ की आवश्यकता होती है।

कैंसर के बाद लंबी अवधि की देखभाल का महत्व

चिकित्सकों का कहना है कि एनल कैंसर के इलाज के बाद भी लंबे समय तक देखभाल की ज़रूरत होती है। उत्तरी आयरलैंड में पेल्विक रेडियोथेरेपी करा चुके मरीजों के लिए एक ही जगह पर सारे ट्रीटमेंट उपलब्ध कराने वाली कोई सुविधा नहीं है, जिससे मरीजों को बहुत दिक्कतें होती हैं।

बेलफ़ास्ट की ट्रिश के अनुसार, ट्रीटमेंट से उबरना तो रिकवरी का पहला पड़ाव है, जिसमें कई लोगों को सालों लग सकते हैं। शरीर पर कई गहरे घाव रह जाते हैं, जो बेहद दर्दनाक होते हैं।

रेडियोथेरेपी यूके और बेलफ़ास्ट हेल्थ एंड सोशल केयर ट्रस्ट की जीआई क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी टीम ने मिलकर इस सबसे कम चर्चित कैंसर के बारे में चर्चा शुरू करने का आह्वान किया है। उनका उद्देश्य कैंसर के दौरान और उसके बाद पूरी देखभाल का एक बेहतर ढांचा विकसित करना है। यह सुनिश्चित करेगा कि ट्रिश जैसी अन्य महिलाओं को उतनी पीड़ा न झेलनी पड़े।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

एनल कैंसर क्या है और इसके मुख्य कारण क्या हैं?

एनल कैंसर एक प्रकार का कैंसर है जो एनल कैनाल की कोशिकाओं में विकसित होता है। इसका मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण को माना जाता है, जो लगभग 90% मामलों के लिए जिम्मेदार है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और अन्य स्त्री रोग संबंधी कैंसर का इतिहास भी जोखिम कारक हो सकते हैं।

पेल्विक रेडियोथेरेपी के दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं?

पेल्विक रेडियोथेरेपी से वजाइना टिश्यू को लंबे समय तक नुकसान पहुँच सकता है, जिसे रेडिएशन-इंड्यूस्ड वेजाइनल स्टेनोसिस कहा जाता है। इसमें वजाइना छोटी और शुष्क हो जाती है, जिससे दर्द, कट लगना और शारीरिक संबंध बनाने में कठिनाई हो सकती है। यह दुष्प्रभाव इलाज के कई महीनों या सालों बाद तक बना रह सकता है।

एनल कैंसर से जुड़े सामाजिक कलंक (Stigma) को कैसे कम किया जा सकता है?

एनल कैंसर से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना, खुले तौर पर बातचीत करना और शिक्षित करना महत्वपूर्ण है। ट्रिश प्रॉसर जैसी कहानियां साझा करने से लोग अपनी समस्याओं के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित होंगे और समाज में इस विषय पर अधिक समझ और सहानुभूति विकसित होगी।

एनल कैंसर के इलाज के बाद देखभाल की क्या आवश्यकता है?

एनल कैंसर के इलाज के बाद लंबी अवधि की देखभाल बहुत ज़रूरी है। इसमें शारीरिक दर्द प्रबंधन, मनोवैज्ञानिक सहायता और रिकवरी की निगरानी शामिल है। मरीजों को पोस्ट-ट्रीटमेंट जटिलताओं, जैसे वजाइनल स्टेनोसिस, से निपटने के लिए निरंतर चिकित्सा सहायता और विशेष क्लिनिक सुविधाओं की आवश्यकता होती है।

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