असम विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है, और राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जालुकबारी सीट से मैदान में उतरे सरमा ने अपनी जीत को लेकर बड़ा दावा किया है, साथ ही कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर और जनता से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए विश्वास जताया कि इस बार उन्हें पिछले चुनाव से भी अधिक वोट मिलेंगे।
मुख्य बिंदु
- सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबारी सीट से इस बार और अधिक वोटों से जीतने का दावा किया।
- उन्होंने कांग्रेस के ‘हिमंता बनाम कांग्रेस’ के नैरेटिव को खारिज करते हुए कहा कि इससे वे और बड़े बनेंगे।
- बीजेपी में कांग्रेस से आए नेताओं को लेकर कोई नाराजगी नहीं है; पार्टी असमिया पहचान और विकास के मुद्दों पर चुनाव लड़ रही है।
- सरमा ने अपने सियासी सफर का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने हार को जीत में बदला और लगातार प्रगति की।
- गौरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक जांच पर केंद्र सरकार को दस्तावेज भेजे गए हैं।
2026 असम चुनाव: हिमंत बिस्वा सरमा का जालुकबारी से बड़ा दावा
असम चुनाव हिमंत बिस्वा सरमा के लिए एक और अग्निपरीक्षा है, लेकिन वह पूरी तरह से आत्मविश्वास में डूबे हुए हैं। उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा, “मुझे लगता है इस बार जालुकबारी सीट से लास्ट टाइम से थोड़ा ज्यादा वोट मुझे मिलना चाहिए।” यह दावा उनके उस विश्वास को दर्शाता है जो उन्होंने अपने मतदाताओं के साथ पिछले 30 सालों में बनाया है।

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि उन्होंने अपना राजनीतिक करियर करीब 30 साल पहले शुरू किया था, और इस दौरान यहां के लोग उनके परिवार का सदस्य बन गए हैं। यह गहरा जुड़ाव ही उनकी ताकत है और इसी के दम पर वे हर चुनाव में अपनी जीत का अंतर बढ़ाते जा रहे हैं।
“हिमंता बनाम कांग्रेस” पर सरमा का पलटवार
कांग्रेस द्वारा असम चुनाव को ‘हिमंता बनाम कांग्रेस’ के रूप में पेश करने पर सीएम सरमा ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस इसे हिमंता बनाम कांग्रेस कहे तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन मुझे क्यों बड़ा बनाना है? मैं तो इतना बड़ा नहीं हूं।” उनका यह बयान कांग्रेस की रणनीति को कमजोर करने की कोशिश थी।
सरमा ने आगे कहा, “अगर वो हेमंत बिस्वा शर्मा के साथ लड़ रहे हैं तो मैं तो एक इंस्टीट्यूशन बन जाऊंगा। आप सोचिए मैं जीतने के बाद कितना बड़ा बन जाऊंगा? मुझे इतना बड़ा मत बनाओ। मुझे छोटा आदमी बने रहने दो।” यह बयान राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा में है और उनकी तीखी प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
बीजेपी में कोई नाराजगी नहीं: सीएम सरमा का बयान
बीजेपी में संभावित आंतरिक नाराजगी की खबरों पर भी मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमने बहुत लंबा काम किया है, इसलिए लिस्ट बहुत लंबी है। बीजेपी असमिया पहचान और विकास—इन दोनों मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रही है।
कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने वाले लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि कोई नाराजगी नहीं है। सरमा ने सवाल उठाया, “हम जब करप्ट बोलते थे तो कांग्रेस उनको अच्छा बोलती थी तो अब जब उनको ले रहे हैं तो उनको आपत्ति क्यों?” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब तक कांग्रेस से एक भी अच्छा हिंदू लीडर नहीं होगा, तब तक उनके दल से नेताओं को लेने का सिलसिला चलता रहेगा।
गौरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक जांच के संबंध में उन्होंने बताया कि इस बारे में लेटर ऑलरेडी चला गया है और दस्तावेज केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं। अब आगे सरकार तय करेगी कि इस मामले में क्या कार्रवाई करनी है।
हिमंत बिस्वा सरमा का शानदार सियासी सफर
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का सियासी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार चुनाव तब लड़ा था जब वह केवल 26 साल के थे, और उस चुनाव में वे करीब 12,000 वोटों से हार गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और 2001 में 12,000 वोटों से जीत दर्ज की।
इसके बाद उनकी जीत का सिलसिला जारी रहा: 2006 में करीब 24,000 वोटों से जीते, 2011 में 45,000 वोटों से और पिछले चुनाव में तो 1 लाख वोटों से रिकॉर्ड जीत दर्ज की, जहां उन्हें लगभग 80% वोट मिले। सरमा ने कहा, “मैंने हार को जीत में बदल दिया। इस बार भी मैं उसी जालुकबारी सीट से चुनाव लड़ूंगा। मुझे लगता है कि इस बार भी मेरी जीत का अंतर अच्छा रहेगा।”
उनकी राजनीतिक यात्रा और उपलब्धियों के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप उनके विकिपीडिया पृष्ठ पर जा सकते हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी सीट से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जालुकबारी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि यह उनकी पारंपरिक सीट है, जहां से वे पिछले 30 सालों से जुड़े हुए हैं और लगातार जीत दर्ज करते आ रहे हैं।
सीएम सरमा ने इस बार कितने वोटों से जीतने का दावा किया है?
सीएम सरमा ने दावा किया है कि इस बार उन्हें जालुकबारी सीट से पिछले चुनाव की तुलना में थोड़ा ज्यादा वोट मिलना चाहिए, जो उनकी जीत के अंतर को और बढ़ाएगा।
कांग्रेस के “हिमंता बनाम कांग्रेस” बयान पर सरमा का क्या कहना है?
सरमा ने इस बयान को कांग्रेस की गलती बताया, उनका कहना है कि इससे वह और बड़े बनेंगे और एक ‘इंस्टीट्यूशन’ बन जाएंगे, इसलिए उन्हें इतना बड़ा न बनाया जाए।
बीजेपी में कांग्रेस से आए नेताओं को लेकर कोई नाराजगी है क्या?
सीएम सरमा के अनुसार, बीजेपी में कांग्रेस से आए नेताओं को लेकर कोई नाराजगी नहीं है। उनका तर्क है कि जब कांग्रेस उन्हें ‘अच्छा’ कहती थी, तब बीजेपी उन्हें ‘करप्ट’ मानती थी, तो अब आपत्ति क्यों होनी चाहिए।
हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर कब शुरू हुआ?
हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर करीब 30 साल पहले शुरू हुआ था, जब उन्होंने पहली बार 26 साल की उम्र में चुनाव लड़ा था।
सरमा ने अपने सियासी सफर में क्या-क्या उपलब्धियां हासिल की हैं?
सरमा ने अपनी पहली हार के बाद 2001 में 12,000 वोटों से जीत दर्ज की, फिर 2006 में 24,000, 2011 में 45,000 और पिछले चुनाव में 1 लाख वोटों से जीत हासिल की, जिसमें उन्हें लगभग 80% वोट मिले। उन्होंने हार को जीत में बदलने का हुनर दिखाया।
गौरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक जांच पर सीएम सरमा ने क्या कहा?
सीएम सरमा ने बताया कि गौरव गोगोई के पाकिस्तान लिंक जांच से संबंधित दस्तावेज केंद्र सरकार को भेजे जा चुके हैं, और अब आगे की कार्रवाई सरकार तय करेगी।