हाल के दिनों में वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल देखी जा रही है, खासकर सोने और चांदी की कीमतों में आई अप्रत्याशित गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। जहाँ एक तरफ भू-राजनीतिक तनाव, जैसे कि ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल की जंग, शेयर बाजार से लेकर कच्चे तेल और रुपये तक हर चीज़ में अस्थिरता ला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘सुरक्षित निवेश’ माने जाने वाले सोने और चांदी में भी रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है: आखिर इस गिरावट के पीछे क्या कारण हैं और निवेशकों को आगे क्या उम्मीद करनी चाहिए?
मुख्य बिंदु
- ईरान-अमेरिका-इसराइल जंग के कारण वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता।
- सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के बाद अचानक भारी गिरावट, सोना 40 सालों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट पर।
- बढ़ती तेल कीमतों से महंगाई का खतरा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना गिरावट का प्रमुख कारण।
- निवेशक नकदी जुटाने और शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी कीमती धातुएं बेच रहे हैं।
- भविष्य की अनिश्चितता मध्य पूर्व में तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे पर निर्भर करती है।
सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल और फिर गिरावट: क्या हो रहा है?
पिछले कुछ हफ्तों से, दुनिया की अर्थव्यवस्था एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स लगभग 10% गिर गया है, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 60% बढ़ गई हैं, और डॉलर के मुकाबले रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इन सबके बीच, सोने और चांदी की कीमतें भी पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचीं और फिर अचानक भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे कई निवेशक हैरान हैं।

पारंपरिक रूप से, युद्ध और अनिश्चितता के समय सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, और इसकी कीमतें बढ़नी चाहिए। 28 फरवरी को अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के तुरंत बाद सोने की कीमतों में उछाल आया भी था। हालांकि, अब स्थिति उलट हो गई है और सोने में भारी गिरावट आई है। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि इसे पिछले 40 सालों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट के रूप में दर्ज किया गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जंग के बाद से सोने की कीमत में 15% से अधिक की गिरावट आई है, जबकि जनवरी 2026 में यह 5,591 डॉलर प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जिसके बाद से इसमें लगभग 20% की गिरावट देखी गई है।
क्यों गिरीं कीमतें? मुख्य कारण क्या हैं?
सोने और चांदी जैसी मूल्यवान धातुओं की कीमतों में गिरावट के कई जटिल कारण माने जा रहे हैं:
बढ़ती महंगाई और ऊंची ब्याज दरें
पहला और सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि जंग की स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी स्थिति में, अमेरिकी फेडरल रिजर्व लंबे समय तक ब्याज दरें ऊंची रख सकता है। चूंकि सोने से कोई निश्चित ब्याज या लाभांश नहीं मिलता, ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में इसका आकर्षण कम हो जाता है। निवेशक अधिक रिटर्न के लिए अन्य परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं।
डॉलर की मजबूती भी सोने पर दबाव डालती है, क्योंकि सोना डॉलर में ट्रेड होता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है।
सुरक्षित निवेश का विरोधाभास
सोने को परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, और ईरान जंग जैसे भू-राजनीतिक तनाव के समय इसकी कीमत बढ़नी चाहिए। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। मार्च 2026 में सोने की कीमतों में 20% की गिरावट आई है, जबकि चांदी की कीमत में तो 32% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। 1983 के बाद से सोने और चांदी की कीमतों में यह सबसे बड़ी गिरावट है, और चांदी अपने उच्चतम स्तर से लगभग 40% नीचे आ गई है।
कहा जा सकता है कि 2026 में इन धातुओं में हुई बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई है, खासकर चांदी के लिए, जिसने 2025 में 170% और जनवरी 2026 में 74% की शानदार वृद्धि देखी थी। मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में अबतक चांदी में 20% की गिरावट दर्ज की गई है।
मुनाफावसूली और नकदी जुटाना
कीमतों में गिरावट का एक और बड़ा कारण मुनाफावसूली भी है। इन दोनों धातुओं की कीमतें इतनी बढ़ गई थीं कि वे उच्च स्तर पर टिक नहीं पाईं। ऑगमोंट की रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, सोने और चांदी में हालिया बिकवाली नकदी बढ़ाने के लिए की गई थी। निवेशक अन्य जगहों पर मार्जिन कॉल की भरपाई के लिए सोने और चांदी जैसी लाभदायक संपत्तियों को बेच रहे हैं। यह दीर्घकालिक मूलभूत सिद्धांतों में कोई बदलाव नहीं है, बल्कि अल्पकालिक मामला है।
इसके अलावा, निवेशक शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी सोना बेच रहे हैं।
कब तक रहेगी यह अनिश्चितता?
बाजार की अनिश्चितता कब तक रहेगी, यह मध्य पूर्व में तनाव की दिशा पर निर्भर करता है। होर्मुज़ स्ट्रेट के खुलने को लेकर अनिश्चितता महंगाई का खतरा बढ़ा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि जब तक तेल की कीमतें स्थिर नहीं हो जातीं और होर्मुज़ स्ट्रेट का मुद्दा हल नहीं हो जाता, तब तक सोने और चांदी दोनों पर दबाव बना रहेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि जब सोने की कीमत गिरती है, तो चीन जैसे देश सोना खरीदते हैं। चीन ने पिछले शुक्रवार और सोमवार को भी सोना खरीदा था, जो भविष्य में कीमतों को सहारा दे सकता है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
मौजूदा स्थिति निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है। पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, चांदी की कीमत तभी बढ़ सकती है जब जंग समाप्त हो जाए। लंबी अवधि के निवेशक कीमतों में गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं, खासकर जब भू-राजनीतिक तनाव कम हो और केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति में स्पष्टता आए।
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आप अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट पर मौद्रिक नीति निर्णयों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जो सोने की कीमतों को प्रभावित करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: मार्च 2026 में सोने और चांदी की कीमतों में इतनी भारी गिरावट क्यों आई?
उत्तर: मार्च 2026 में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारणों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव (जैसे ईरान जंग), बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें जिससे महंगाई का खतरा बढ़ा, और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें ऊंची रखने की संभावना शामिल है। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अन्य संपत्तियों में नुकसान की भरपाई के लिए नकदी जुटाना भी एक प्रमुख कारण रहा।
प्रश्न: क्या सोने को अभी भी सुरक्षित निवेश माना जा सकता है?
उत्तर: परंपरागत रूप से सोने को एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, खासकर अनिश्चितता के समय में। हालांकि, मौजूदा स्थिति में बढ़ती ब्याज दरों और नकदी की आवश्यकता के कारण इसका आकर्षण अस्थायी रूप से कम हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट अल्पकालिक हो सकती है, लेकिन बाजार की अनिश्चितता बने रहने तक दबाव रहेगा।
प्रश्न: सोने और चांदी की कीमतों में स्थिरता कब तक आने की उम्मीद है?
उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, सोने और चांदी की कीमतों में स्थिरता मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (विशेषकर हॉर्मुज स्ट्रेट के मुद्दे) के समाधान और कच्चे तेल की कीमतों के स्थिर होने पर निर्भर करती है। जब तक ये मुद्दे हल नहीं होते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। चीन जैसे देशों द्वारा सोने की खरीदारी भविष्य में कीमतों को सहारा दे सकती है।