Rujuta Diwekar predicts 2026 health trends: नए साल का आगमन हो चुका है और नए साल की दस्तक के साथ लोग फिटनेस और हेल्थ को लेकर नए संकल्प लेते हैं. सबसे ज्यादा लोग वेट लॉस रेजुलेशन लेते हैं, लेकिन इस बीच सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर ने 2026 को लेकर कुछ बड़ी भविष्यवाणियां की हैं. करीना कपूर के फिटनेस सफर के पीछे अहम भूमिका निभाने वाली रुजुता ने इंस्टाग्राम पर ‘Predicting health trends in 2026’ कैप्शन से एक पोस्ट शेयर कर आने वाले साल के हेल्थ ट्रेंड्स पर खुलकर बात की.
रुजुता के मुताबिक, 2026 में हेल्थ की दुनिया में कुछ पॉजिटिव बदलाव देखने को मिलेंगे, तो कुछ ऐसे ट्रेंड्स भी होंगे जिन पर सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने साफ कहा, कुछ अच्छी खबर है और कुछ बुरी, और फिर तीन बड़े बदलावों की ओर इशारा किया.
प्रोटीन का क्रेज होगा कम
पिछले कुछ सालों में हाई-प्रोटीन डाइट और सप्लीमेंट्स का जबरदस्त क्रेज देखने को मिला. लेकिन रुजुता का मानना है कि अब यह ट्रेंड अपने चरम पर पहुंच चुका है. 2026 में लोगों को यह समझ आने लगेगा कि जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से कोई खास फायदा नहीं होता. उन्होंने कहा, प्रोटीन का ऑब्सेशन इस साल पीक पर था और 2026 में घटेगा, क्योंकि अब इसके अतिरिक्त सेवन से फायदे नहीं बल्कि सिर्फ बेचने वालों को लाभ होता दिख रहा है.
शराब की बिक्री में आएगी गिरावट
रुजुता ने कहा कि साल 2026 में हेल्थ ट्रेंड में शराब की बिक्री में कमी देखने को मिलेगी. उनका कहना है कि पश्चिमी देशों में पहले ही शराब पीने का चलन कम हो रहा है, क्योंकि इसके लंबे समय के नुकसान अब आम लोगों की समझ में आने लगे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत और अन्य देशों में भी जल्द इस दिशा में कदम बढ़ाएंगे और लोग हेल्थ को प्रायोरिटी देंगे.
वेट लॉस पिल्स का बढ़ता चलन
जहां दो ट्रेंड्स अच्छे हैं, वहीं तीसरा थोड़ा चिंता बढ़ाने वाला है. रुजुता के अनुसार, वजन घटाने वाली दवाइयों और पिल्स का चलन 2026 में और बढ़ेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इनका इस्तेमाल करने वाले शुरुआती लोग जल्द ही इन्हें छोड़ना शुरू करेंगे, क्योंकि इसके साइड इफेक्ट सामने आने लगेंगे. खासतौर पर मसल लॉस यानी मांसपेशियों के तेजी से घटने को लेकर उन्होंने चेतावनी दी.
इन सभी ट्रेंड्स के बीच रुजुता दिवेकर का मानना है कि असली सेहत किसी लैब में बनी दवाओं में नहीं, बल्कि हमारी रसोई और पुरानी परंपराओं में छिपी है. उन्होंने कहा कि भरोसेमंद वैज्ञानिक रिसर्च आगे भी समय-परीक्षित भारतीय आदतों और कॉमन सेंस को सही साबित करती रहेगी.
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