2026 में रेबीज वैक्सीन उपलब्धता: सरकारी अस्पतालों में क्यों गहरा संकट?

नई दिल्ली, 2026: देश भर के सरकारी अस्पतालों में रेबीज वैक्सीन उपलब्धता को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्यसभा में गुजरात के वरिष्ठ सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरे अंतर को उजागर किया। उनका सीधा सवाल था कि जब वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, तो गरीब मरीज खाली हाथ क्यों लौट रहे हैं?

मुख्य बिंदु

  • राज्यसभा में सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता पर सवाल उठाए, सरकारी दावों को चुनौती दी।
  • स्वास्थ्य मंत्री के पर्याप्त वैक्सीन उपलब्धता के बयान और अस्पतालों की कमी के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
  • गुजरात के बोटाद, भावनगर और अमरेली जैसे जिलों में रेबीज के टीकों का भारी संकट बताया गया।
  • गोहिल ने केंद्र सरकार से सीधे सरकारी अस्पतालों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

रेबीज वैक्सीन उपलब्धता: कथनी और हकीकत में बड़ा अंतर

राज्यसभा में माननीय सभापति सी.पी. राधाकृष्णन के समक्ष बोलते हुए, गुजरात से राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने एक गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में रेबीज के टीके उपलब्ध नहीं हैं, जबकि स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में दावा किया था कि देश में ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ और ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

रेबीज वैक्सीन उपलब्धता

गोहिल ने मंत्री के इस दावे पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि कागजों पर वैक्सीन की उपलब्धता और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। यह स्थिति कई मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, जिन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।

कागजों पर भरपूर, फिर भी मरीज खाली हाथ क्यों?

सांसद गोहिल ने सवालिया लहजे में पूछा, “जब वैक्सीन पूरी तरह से देश में उपलब्ध है, तो सिस्टम में आखिर कहां दिक्कत आ रही है? गरीब आदमी इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में जाता है, लेकिन वहां उसे निराशा हाथ लगती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि रेबीज वैक्सीन उपलब्धता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अस्पतालों में होनी चाहिए।

इस गंभीर ‘सिस्टम फेलियर’ पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की। रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, और इसके बचाव का एकमात्र तरीका कुत्ते के काटने के बाद तुरंत वैक्सीन लगवाना है। यदि यह भी उपलब्ध न हो, तो यह वाकई गंभीर समस्या है।

गुजरात में गहराता रेबीज टीकों का संकट

सांसद गोहिल ने जमीनी हकीकत का ब्यौरा देते हुए सदन को बताया कि उनके पास हर दिन गुजरात के विभिन्न हिस्सों से फोन आते हैं। उन्होंने विशेष रूप से बोटाद, भावनगर और अमरेली जैसे जिलों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां रेबीज के टीकों का भारी संकट है।

स्थानीय संदर्भ देते हुए उन्होंने समझाया कि गुजरात में पागल कुत्ते को ‘हड़कायु कुत्रू’ और रेबीज की बीमारी को ‘हड़कवा’ कहा जाता है। कुत्ते के काटने के बाद इस जानलेवा वायरस से बचने का एकमात्र उपाय समय पर वैक्सीन मिलना है, जो सरकारी अस्पतालों से नदारद है। रेबीज रोग के बारे में अधिक जानकारी के लिए, आप इस लिंक पर जा सकते हैं।

जीवनरक्षक वैक्सीन की सीधी आपूर्ति की मांग

मानव जीवन के मूल्य को सर्वोपरि बताते हुए गोहिल ने सदन में भावुक लेकिन दृढ़ शब्दों में कहा, “इंसान की जिंदगी से महंगा और कुछ भी नहीं है।” उन्होंने सरकार से एक ठोस व्यवस्था बनाने की मांग की। उनका सीधा सवाल था कि अगर सरकार के पास वैक्सीन का पूरा स्टॉक है, तो क्या यह सप्लाई चेन या सिस्टम का फेलियर नहीं है?

गोहिल ने मांग की कि भारत सरकार देश के सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ और ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ की सीधे (Direct) सप्लाई सुनिश्चित करने की व्यवस्था करे, ताकि मरीजों को दर-दर न भटकना पड़े।

शक्तिसिंह गोहिल के इस हस्तक्षेप ने स्वास्थ्य सुविधाओं के वितरण तंत्र पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। अब यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस ‘सिस्टम फेलियर’ को दुरुस्त करने और सरकारी अस्पतालों तक जीवनरक्षक रेबीज वैक्सीन की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: राज्यसभा में रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता का मुद्दा किसने उठाया?

A1: राज्यसभा में गुजरात से सांसद और वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने सरकारी अस्पतालों में रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता के मुद्दे को उठाया।

Q2: सरकार के अनुसार देश में रेबीज वैक्सीन की स्थिति क्या है?

A2: स्वास्थ्य मंत्री के बयान के अनुसार, देश में ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ और ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

Q3: गुजरात के किन जिलों में रेबीज टीकों का संकट बताया गया?

A3: सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने गुजरात के बोटाद, भावनगर और अमरेली जैसे जिलों में रेबीज के टीकों के भारी संकट का जिक्र किया।

Q4: शक्तिसिंह गोहिल ने सरकार से क्या प्रमुख मांग की है?

A4: गोहिल ने केंद्र सरकार से देश के सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों में ‘एंटी-रेबीज वैक्सीन’ और ‘रेबीज इम्यूनोग्लोबिन’ की सीधी (Direct) सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

Q5: ‘हड़कवा’ और ‘हड़कायु कुत्रू’ शब्द किस बीमारी से संबंधित हैं?

A5: ये शब्द गुजरात में रेबीज की बीमारी (‘हड़कवा’) और पागल कुत्ते (‘हड़कायु कुत्रू’) के लिए स्थानीय रूप से उपयोग किए जाते हैं।

Q6: इस मुद्दे से किस ‘सिस्टम फेलियर’ पर बहस छिड़ गई है?

A6: इस मुद्दे ने स्वास्थ्य सुविधाओं के वितरण तंत्र (Delivery System) में मौजूदा ‘सिस्टम फेलियर’ पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

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