मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बल महिला स्थायी कमीशन को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। इस निर्णय से भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। अदालत ने साफ कर दिया कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी भी स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की हकदार हैं, जिससे उन्हें पुरुषों के बराबर अवसर और सम्मान मिलेगा।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार दिया।
- अदालत ने सशस्त्र बलों में महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली पर चिंता व्यक्त की।
- Article 142 का उपयोग करते हुए, 2019-2021 के अधिकारियों को 20 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा, पेंशन मिलेगी।
- नौसेना और वायु सेना के लिए विशिष्ट निर्देश दिए गए, मूल्यांकन प्रणालियों की समीक्षा का आदेश।
सशस्त्र बल महिला स्थायी कमीशन: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में अहम सुनवाई करते हुए कहा कि सिस्टम में महिलाओं को असमानता का सामना करना पड़ा है। यह फैसला न केवल महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करता है, बल्कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में भविष्य के लिए एक नई दिशा भी तय करता है।

लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा कदम
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरुष SSCO यह उम्मीद नहीं कर सकते कि स्थायी आयोग में सिर्फ पुरुष ही होंगे। महिला SSCO को स्थायी आयोग से वंचित करना मूल्यांकन के सिस्टम में मौजूद भेदभाव का सीधा परिणाम था। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय लैंगिक समानता की दिशा में एक मील का पत्थर है।
भेदभावपूर्ण मूल्यांकन प्रणाली पर अदालत की टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने पाया कि महिलाओं की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को बहुत ही आम तरीके से आंका गया था। उनके ACR इस सोच के साथ किए गए थे कि वे कभी भी परमानेंट कमीशन के लिए एलिजिबल नहीं होंगी। इस पूर्वाग्रह ने उनके मूल्यांकन पर नकारात्मक असर डाला, जिससे वे अपने पुरुष साथियों के मुकाबले नुकसान में रहीं। अदालत ने कहा कि ACR कभी भी ओवरऑल कंपैरिटिव मेरिट को ध्यान में रखकर नहीं किए गए थे।
Article 142 का इस्तेमाल और पेंशन संबंधी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि 2019, 2020 और 2021 के सिलेक्शन बोर्ड में सोचे गए अधिकारियों को 20 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा। वे पेंशन के हकदार होंगे, हालांकि उन्हें वेतन का बकाया नहीं मिलेगा। पेंशन की नई गणना 1 नवंबर, 2025 से लागू की जाएगी।
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नौसेना और वायु सेना के लिए विशेष निर्देश
नौसेना के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि एकमुश्त उपाय के तहत एलिजिबल फीमेल ऑफिसर्स को मेडिकल फिटनेस के आधार पर स्थायी कमीशन मिलेगा। 2009 के बाद शामिल हुई महिलाएं भी इसकी हकदार होंगी। वहीं, वायु सेना को लेकर कोर्ट ने बताया कि जिन अधिकारियों को करियर में सही मौका नहीं मिला, उनके खिलाफ सेवा की अवधि का इस्तेमाल स्थायी कमीशन रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।
भविष्य के लिए मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के आदेश
इस ऐतिहासिक फैसले के साथ, सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों को अपने इवैलुएशन सिस्टम और ACR सिस्टम का रिव्यू करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में महिलाओं के साथ ऐसा भेदभाव न हो और उन्हें पूरी पारदर्शिता तथा निष्पक्षता के साथ आंका जाए। यह सुनिश्चित करेगा कि लैंगिक समानता केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक अभ्यास में भी लागू हो।
भारतीय सशस्त्र बलों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय सशस्त्र सेनाएँ विकिपीडिया पेज देख सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1: सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों के लिए क्या है?
A1: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की हकदार हैं, जिससे उन्हें पुरुषों के समान अधिकार और अवसर मिलेंगे।
Q2: अदालत ने सशस्त्र बलों में महिलाओं के मूल्यांकन को लेकर क्या पाया?
A2: अदालत ने पाया कि महिलाओं की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) को भेदभावपूर्ण तरीके से आंका गया था, इस धारणा के साथ कि वे कभी स्थायी कमीशन के लिए योग्य नहीं होंगी, जिससे उनके मूल्यांकन पर नकारात्मक असर पड़ा।
Q3: Article 142 का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया गया?
A3: सुप्रीम कोर्ट ने Article 142 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया कि 2019, 2020 और 2021 के सिलेक्शन बोर्ड में विचार किए गए अधिकारियों को 20 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा और वे पेंशन के हकदार होंगे।
Q4: क्या इस फैसले से महिला अधिकारियों को वेतन का बकाया भी मिलेगा?
A4: नहीं, अदालत ने निर्देश दिया है कि पात्र महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा, लेकिन उन्हें वेतन का कोई बकाया नहीं दिया जाएगा।
Q5: नौसेना और वायु सेना के लिए इस फैसले के क्या खास निर्देश हैं?
A5: नौसेना के लिए, पात्र महिला अधिकारियों को मेडिकल फिटनेस के आधार पर स्थायी कमीशन मिलेगा (2009 के बाद शामिल हुई महिलाएं भी)। वायु सेना के लिए, सेवा की अवधि का उपयोग स्थायी कमीशन रोकने के लिए नहीं किया जा सकता यदि अधिकारियों को करियर में सही अवसर नहीं मिले।
Q6: सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए क्या निर्देश दिए हैं?
A6: सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों को अपने मूल्यांकन प्रणाली और ACR सिस्टम की समीक्षा करने का निर्देश दिया है ताकि भविष्य में महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और लैंगिक समानता सुनिश्चित हो।