अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के पुराने इलाकों में आए दिन एचआइवी पाजीटिव के केस सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ रही है। इसलिए यहां पर बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराकर मरीजों को चिह्नित किया जाना है। इसके लिए विभागीय टीमें यहां चेकिंग अभियान चलाएंगी। ताकि जो लोगों को एंटी रीट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) से जोड़कर उनकी जरूरी जांचें कराने के साथ उनका मुफ्त इलाज शुरू कराया जा सके। साथ ही उन पर मरीजों पर विभागीय निगरानी भी शुरू हो सके। संपूर्ण सुरक्षा केंद्रों के माध्यम से एचआइवी के मरीजों की जांच होती है। इसमें जो मरीज पाजीटिव मिलते हैं, उन्हें एआरटी के जरिये बेसलाइन जांचें और इलाज की सुविधा दी जाती है। इस साल जिला अस्पताल के संपूर्ण सुरक्षा केंद्र पर 9030 और बहेड़ी में 4490 लोगों की जांचें कराई गई है। अब तक करीब 718 लोग एचआइवी पाजीटिव मिले हैं और इसकी जांचें भी कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह रिपोर्ट परेशान कर रही है कि शहर के पुराने क्षेत्र में एचआइवी के आए दिन केस सामने आ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब लोग काफी कम संख्या में जांचें करा रहे हैं। इसलिए अधिकारियों ने बालजती स्कूल में कैंप के जरिये एक साथ व्यापक स्तर पर जांच कराने की योजना तैयार की है। ताकि कांकरटोला, रबड़ीटोला, नवादा शेखान, घेरजाफर खां सहित कई पुराने मुहल्लों के लोगों की जांचें की जा सकें। इस दौरान मरीजों की एचआवी के साथ सिफलिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी व सी की स्क्रीनिंग के साथ उनके लिवर, किडनी, खून आदि के लिए भी सैंपल भी लिए जाएंगे। इसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएएम, फार्मासिस्ट और आशा कार्यकर्ताओं की टीम भी रहेगी, ताकि इस घातक बीमारी की चपेट में जो लोग आ चुके हैं, उनका किसी देरी के साथ इलाज शुरू कराया जा सके। एचआइवी मरीजों की जांच के लिए तीन जगहों पर पहुंचेंगी टीमें एचआइवी के मरीजों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराने के लिए एक से 16 जनवरी के बीच तीन जगहों पर स्वास्थ्य टीमें पहुंचेंगी। इसमें एक जनवरी को घेरजाफर खां, छह जनवरी को सीबीगंज और 16 जनवरी को अभयपुर, भोजीपुरा में टीमें पहुंचकर वहां कैंप के जरिये मरीजों की जांच करेंगी। इससे ताकि उनमें एचआइवी के साथ हेपेटाइटिस बी व सी, टीबी आदि की बीमारियों का भी पता लगाया जा सके। इसे लेकर सीएमओ की ओर से संबंधित चिकित्सा अधिकारियों की भी गाइड-लाइंस जारी कर दी गई है। संपूर्ण सुरक्षा केंद्र की काउंसलर राखी गौतम ने बताया कि इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है। चार माह के दौरान हुईं जांचें और एआरटी सेंटर में भेजने वालों की संख्या माह महिला पुरुष कुल एआरटी सेंटर भेज गए जुलाई 568 463 1032 39 अगस्त 524 472 998 24 सितंबर 623 495 1118 34 अक्टूबर 453 354 808 14 जिन मरीजों की जांच की जाती है और वे पाजीटिव मिलते हैं तो उन्हें एआरटी सेंटर के माध्यम से इलाज उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही उनकी मानीटरिंग भी की जाती है कि वे दवा का बीच में ही न छोड़ दें। इसे मरीजों को काफी लाभ मिला है। – डा. संजीव मिश्रा, मेडिकल आफिसर, एआरटी सेंटर यह भी पढ़ें- बच्चों की 5 गंभीर बीमारियों पर AI जैसी निगरानी! स्वास्थ्य विभाग और WHO रखेगा ‘गिरते-उठते ग्राफ’ पर नजर
Highlights
अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के पुराने इलाकों में आए दिन एचआइवी पाजीटिव के केस सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ रही है। इसलिए यहां पर बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराकर मरीजों को चिह्नित किया जाना है। इसके लिए विभागीय टीमें यहां चेकिंग अभियान चलाएंगी। ताकि जो लोगों को एंटी रीट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) से जोड़कर उनकी जरूरी जांचें कराने के साथ उनका मुफ्त इलाज शुरू कराया जा सके। साथ ही उन पर मरीजों पर विभागीय निगरानी भी शुरू हो सके।
संपूर्ण सुरक्षा केंद्रों के माध्यम से एचआइवी के मरीजों की जांच होती है। इसमें जो मरीज पाजीटिव मिलते हैं, उन्हें एआरटी के जरिये बेसलाइन जांचें और इलाज की सुविधा दी जाती है। इस साल जिला अस्पताल के संपूर्ण सुरक्षा केंद्र पर 9030 और बहेड़ी में 4490 लोगों की जांचें कराई गई है। अब तक करीब 718 लोग एचआइवी पाजीटिव मिले हैं और इसकी जांचें भी कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह रिपोर्ट परेशान कर रही है कि शहर के पुराने क्षेत्र में एचआइवी के आए दिन केस सामने आ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब लोग काफी कम संख्या में जांचें करा रहे हैं। इसलिए अधिकारियों ने बालजती स्कूल में कैंप के जरिये एक साथ व्यापक स्तर पर जांच कराने की योजना तैयार की है। ताकि कांकरटोला, रबड़ीटोला, नवादा शेखान, घेरजाफर खां सहित कई पुराने मुहल्लों के लोगों की जांचें की जा सकें।
इस दौरान मरीजों की एचआवी के साथ सिफलिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी व सी की स्क्रीनिंग के साथ उनके लिवर, किडनी, खून आदि के लिए भी सैंपल भी लिए जाएंगे। इसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएएम, फार्मासिस्ट और आशा कार्यकर्ताओं की टीम भी रहेगी, ताकि इस घातक बीमारी की चपेट में जो लोग आ चुके हैं, उनका किसी देरी के साथ इलाज शुरू कराया जा सके।
एचआइवी मरीजों की जांच के लिए तीन जगहों पर पहुंचेंगी टीमें
एचआइवी के मरीजों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराने के लिए एक से 16 जनवरी के बीच तीन जगहों पर स्वास्थ्य टीमें पहुंचेंगी। इसमें एक जनवरी को घेरजाफर खां, छह जनवरी को सीबीगंज और 16 जनवरी को अभयपुर, भोजीपुरा में टीमें पहुंचकर वहां कैंप के जरिये मरीजों की जांच करेंगी।
इससे ताकि उनमें एचआइवी के साथ हेपेटाइटिस बी व सी, टीबी आदि की बीमारियों का भी पता लगाया जा सके। इसे लेकर सीएमओ की ओर से संबंधित चिकित्सा अधिकारियों की भी गाइड-लाइंस जारी कर दी गई है। संपूर्ण सुरक्षा केंद्र की काउंसलर राखी गौतम ने बताया कि इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
चार माह के दौरान हुईं जांचें और एआरटी सेंटर में भेजने वालों की संख्या
| माह | महिला | पुरुष | कुल | एआरटी सेंटर भेज गए |
| जुलाई | 568 | 463 | 1032 | 39 |
| अगस्त | 524 | 472 | 998 | 24 |
| सितंबर | 623 | 495 | 1118 | 34 |
| अक्टूबर | 453 | 354 | 808 | 14 |
जिन मरीजों की जांच की जाती है और वे पाजीटिव मिलते हैं तो उन्हें एआरटी सेंटर के माध्यम से इलाज उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही उनकी मानीटरिंग भी की जाती है कि वे दवा का बीच में ही न छोड़ दें। इसे मरीजों को काफी लाभ मिला है।
– डा. संजीव मिश्रा, मेडिकल आफिसर, एआरटी सेंटर
यह भी पढ़ें- बच्चों की 5 गंभीर बीमारियों पर AI जैसी निगरानी! स्वास्थ्य विभाग और WHO रखेगा ‘गिरते-उठते ग्राफ’ पर नजर
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अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के पुराने इलाकों में आए दिन एचआइवी पाजीटिव के केस सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ रही है। इसलिए यहां पर बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराकर मरीजों को चिह्नित किया जाना है। इसके लिए विभागीय टीमें यहां चेकिंग अभियान चलाएंगी। ताकि जो लोगों को एंटी रीट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) से जोड़कर उनकी जरूरी जांचें कराने के साथ उनका मुफ्त इलाज शुरू कराया जा सके। साथ ही उन पर मरीजों पर विभागीय निगरानी भी शुरू हो सके।
संपूर्ण सुरक्षा केंद्रों के माध्यम से एचआइवी के मरीजों की जांच होती है। इसमें जो मरीज पाजीटिव मिलते हैं, उन्हें एआरटी के जरिये बेसलाइन जांचें और इलाज की सुविधा दी जाती है। इस साल जिला अस्पताल के संपूर्ण सुरक्षा केंद्र पर 9030 और बहेड़ी में 4490 लोगों की जांचें कराई गई है। अब तक करीब 718 लोग एचआइवी पाजीटिव मिले हैं और इसकी जांचें भी कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह रिपोर्ट परेशान कर रही है कि शहर के पुराने क्षेत्र में एचआइवी के आए दिन केस सामने आ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब लोग काफी कम संख्या में जांचें करा रहे हैं। इसलिए अधिकारियों ने बालजती स्कूल में कैंप के जरिये एक साथ व्यापक स्तर पर जांच कराने की योजना तैयार की है। ताकि कांकरटोला, रबड़ीटोला, नवादा शेखान, घेरजाफर खां सहित कई पुराने मुहल्लों के लोगों की जांचें की जा सकें।
इस दौरान मरीजों की एचआवी के साथ सिफलिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी व सी की स्क्रीनिंग के साथ उनके लिवर, किडनी, खून आदि के लिए भी सैंपल भी लिए जाएंगे। इसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएएम, फार्मासिस्ट और आशा कार्यकर्ताओं की टीम भी रहेगी, ताकि इस घातक बीमारी की चपेट में जो लोग आ चुके हैं, उनका किसी देरी के साथ इलाज शुरू कराया जा सके।
एचआइवी मरीजों की जांच के लिए तीन जगहों पर पहुंचेंगी टीमें
एचआइवी के मरीजों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराने के लिए एक से 16 जनवरी के बीच तीन जगहों पर स्वास्थ्य टीमें पहुंचेंगी। इसमें एक जनवरी को घेरजाफर खां, छह जनवरी को सीबीगंज और 16 जनवरी को अभयपुर, भोजीपुरा में टीमें पहुंचकर वहां कैंप के जरिये मरीजों की जांच करेंगी।
इससे ताकि उनमें एचआइवी के साथ हेपेटाइटिस बी व सी, टीबी आदि की बीमारियों का भी पता लगाया जा सके। इसे लेकर सीएमओ की ओर से संबंधित चिकित्सा अधिकारियों की भी गाइड-लाइंस जारी कर दी गई है। संपूर्ण सुरक्षा केंद्र की काउंसलर राखी गौतम ने बताया कि इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
चार माह के दौरान हुईं जांचें और एआरटी सेंटर में भेजने वालों की संख्या
| माह | महिला | पुरुष | कुल | एआरटी सेंटर भेज गए |
| जुलाई | 568 | 463 | 1032 | 39 |
| अगस्त | 524 | 472 | 998 | 24 |
| सितंबर | 623 | 495 | 1118 | 34 |
| अक्टूबर | 453 | 354 | 808 | 14 |
जिन मरीजों की जांच की जाती है और वे पाजीटिव मिलते हैं तो उन्हें एआरटी सेंटर के माध्यम से इलाज उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही उनकी मानीटरिंग भी की जाती है कि वे दवा का बीच में ही न छोड़ दें। इसे मरीजों को काफी लाभ मिला है।
– डा. संजीव मिश्रा, मेडिकल आफिसर, एआरटी सेंटर
यह भी पढ़ें- बच्चों की 5 गंभीर बीमारियों पर AI जैसी निगरानी! स्वास्थ्य विभाग और WHO रखेगा ‘गिरते-उठते ग्राफ’ पर नजर
FAQ
10 FAQ in Hindi:
अनूप गुप्ता, जागरण, बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के पुराने इलाकों में आए दिन एचआइवी पाजीटिव के केस सामने आ रहे हैं। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ रही है। इसलिए यहां पर बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराकर मरीजों को चिह्नित किया जाना है। इसके लिए विभागीय टीमें यहां चेकिंग अभियान चलाएंगी। ताकि जो लोगों को एंटी रीट्रोवायरल थैरेपी (एआरटी) से जोड़कर उनकी जरूरी जांचें कराने के साथ उनका मुफ्त इलाज शुरू कराया जा सके। साथ ही उन पर मरीजों पर विभागीय निगरानी भी शुरू हो सके।
संपूर्ण सुरक्षा केंद्रों के माध्यम से एचआइवी के मरीजों की जांच होती है। इसमें जो मरीज पाजीटिव मिलते हैं, उन्हें एआरटी के जरिये बेसलाइन जांचें और इलाज की सुविधा दी जाती है। इस साल जिला अस्पताल के संपूर्ण सुरक्षा केंद्र पर 9030 और बहेड़ी में 4490 लोगों की जांचें कराई गई है। अब तक करीब 718 लोग एचआइवी पाजीटिव मिले हैं और इसकी जांचें भी कराई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह रिपोर्ट परेशान कर रही है कि शहर के पुराने क्षेत्र में एचआइवी के आए दिन केस सामने आ रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब लोग काफी कम संख्या में जांचें करा रहे हैं। इसलिए अधिकारियों ने बालजती स्कूल में कैंप के जरिये एक साथ व्यापक स्तर पर जांच कराने की योजना तैयार की है। ताकि कांकरटोला, रबड़ीटोला, नवादा शेखान, घेरजाफर खां सहित कई पुराने मुहल्लों के लोगों की जांचें की जा सकें।
इस दौरान मरीजों की एचआवी के साथ सिफलिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी व सी की स्क्रीनिंग के साथ उनके लिवर, किडनी, खून आदि के लिए भी सैंपल भी लिए जाएंगे। इसमें चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएएम, फार्मासिस्ट और आशा कार्यकर्ताओं की टीम भी रहेगी, ताकि इस घातक बीमारी की चपेट में जो लोग आ चुके हैं, उनका किसी देरी के साथ इलाज शुरू कराया जा सके।
एचआइवी मरीजों की जांच के लिए तीन जगहों पर पहुंचेंगी टीमें
एचआइवी के मरीजों की बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग कराने के लिए एक से 16 जनवरी के बीच तीन जगहों पर स्वास्थ्य टीमें पहुंचेंगी। इसमें एक जनवरी को घेरजाफर खां, छह जनवरी को सीबीगंज और 16 जनवरी को अभयपुर, भोजीपुरा में टीमें पहुंचकर वहां कैंप के जरिये मरीजों की जांच करेंगी।
इससे ताकि उनमें एचआइवी के साथ हेपेटाइटिस बी व सी, टीबी आदि की बीमारियों का भी पता लगाया जा सके। इसे लेकर सीएमओ की ओर से संबंधित चिकित्सा अधिकारियों की भी गाइड-लाइंस जारी कर दी गई है। संपूर्ण सुरक्षा केंद्र की काउंसलर राखी गौतम ने बताया कि इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
चार माह के दौरान हुईं जांचें और एआरटी सेंटर में भेजने वालों की संख्या
| माह | महिला | पुरुष | कुल | एआरटी सेंटर भेज गए |
| जुलाई | 568 | 463 | 1032 | 39 |
| अगस्त | 524 | 472 | 998 | 24 |
| सितंबर | 623 | 495 | 1118 | 34 |
| अक्टूबर | 453 | 354 | 808 | 14 |
जिन मरीजों की जांच की जाती है और वे पाजीटिव मिलते हैं तो उन्हें एआरटी सेंटर के माध्यम से इलाज उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही उनकी मानीटरिंग भी की जाती है कि वे दवा का बीच में ही न छोड़ दें। इसे मरीजों को काफी लाभ मिला है।
– डा. संजीव मिश्रा, मेडिकल आफिसर, एआरटी सेंटर
यह भी पढ़ें- बच्चों की 5 गंभीर बीमारियों पर AI जैसी निगरानी! स्वास्थ्य विभाग और WHO रखेगा ‘गिरते-उठते ग्राफ’ पर नजर