Last Updated:November 30, 2025, 17:07 ISTपुणे की एक महिला ने बैंक की नौकरी छोड़कर गोबर-मिट्टी से चीजें बनाने का बिजनेस शुरू किया. अब उनकी लाखों की कमाई हो रही है.गोबर से उत्पाद बना नाम कमा रहीं देवयानीपारंपरिक नौकरी की सीमा तोड़कर अपनी नई सोच को हकीकत में बदलने वालों की संख्या बढ़ रही है. इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं धनकवड़ी की देवयानी हैं, जिन्होंने बैंक की 40 हजार की स्थायी नौकरी छोड़कर ‘माय माटी’ नाम से एक अनोखा और पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस शुरू किया. उन्होंने गाय के गोबर से गद्दी, रंगोली, आसन, दीये और खास लैब-टेस्टेड मिट्टी से किचन के बर्तन और पानी के मटके बनाकर एक अलग तरह की पहल की है.बचपन से ही नेचुरोपैथी, मिट्टी और पारंपरिक तरीकों में रुचि रखने वाली देवयानी तांबोळी करीब आठ साल बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुकी थीं. लेकिन कुछ अलग और फायदेमंद करने की चाह में उन्होंने चार साल पहले नौकरी छोड़ दी. इसके बाद ‘मिट्टी हब’ ब्रांड के तहत मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाने का प्रयोग शुरू किया. लैब में टेस्ट की गई मिट्टी से बने किचन के सामान जब ग्राहकों तक पहुंचे तो उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला.इसी प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए उन्होंने गाय के गोबर से चीजें बनाने पर रिसर्च शुरू किया. दो साल लगातार प्रयोग करने के बाद उन्होंने एक्यूप्रेशर फोल्डेबल गद्दी बनाने में सफलता पाई और इस आइडिया का पेटेंट भी उनके नाम दर्ज हो गया. भारतीय संस्कृति में गाय का गोबर और गोमूत्र सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. पहले घरों की दीवारें और आंगन गोबर से लीपे जाते थे. इन्हीं गुणों का अध्ययन कर गोबर से बनी रंगोली, आसन, लैंप और कई उपयोगी चीजों को ग्राहकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला.Location :Pune,MaharashtraFirst Published :November 30, 2025, 17:07 ISThomemaharashtraबैंक की नौकरी छोड़ी और गोबर से बनाए उत्पाद, अब बना पुणे का फेमस ब्रांडफिलहाल उनके पास मिट्टी और गोबर से बनने वाली करीब 70 से 80 चीजों की रेंज है. कम से कम 150 रुपये से शुरू होने वाले ये प्रोडक्ट्स सस्ते, नेचुरल और इको-फ्रेंडली होने की वजह से बाजार में इनकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है. मिट्टी के बिजनेस को दस साल हो गए हैं, लेकिन गोबर से प्रोडक्ट्स बनाने का काम कुछ महीने पहले ही शुरू हुआ है. इस बिजनेस में परिवार का भी अच्छा सपोर्ट मिल रहा है.पर्यावरण के अनुकूल, सेहतमंद और देसी तरीके को मॉडर्न टच देते हुए देवयानी तांबोळी का माय माटी और मिट्टी हब आज कई युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणा बन गया है.खबरें पढ़ने का बेहतरीन अनुभवQR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करेंlogin
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पुणे की एक महिला ने बैंक की नौकरी छोड़कर गोबर-मिट्टी से चीजें बनाने का बिजनेस शुरू किया. अब उनकी लाखों की कमाई हो रही है.
पारंपरिक नौकरी की सीमा तोड़कर अपनी नई सोच को हकीकत में बदलने वालों की संख्या बढ़ रही है. इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं धनकवड़ी की देवयानी हैं, जिन्होंने बैंक की 40 हजार की स्थायी नौकरी छोड़कर ‘माय माटी’ नाम से एक अनोखा और पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस शुरू किया. उन्होंने गाय के गोबर से गद्दी, रंगोली, आसन, दीये और खास लैब-टेस्टेड मिट्टी से किचन के बर्तन और पानी के मटके बनाकर एक अलग तरह की पहल की है.
बचपन से ही नेचुरोपैथी, मिट्टी और पारंपरिक तरीकों में रुचि रखने वाली देवयानी तांबोळी करीब आठ साल बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुकी थीं. लेकिन कुछ अलग और फायदेमंद करने की चाह में उन्होंने चार साल पहले नौकरी छोड़ दी. इसके बाद ‘मिट्टी हब’ ब्रांड के तहत मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाने का प्रयोग शुरू किया. लैब में टेस्ट की गई मिट्टी से बने किचन के सामान जब ग्राहकों तक पहुंचे तो उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला.
इसी प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए उन्होंने गाय के गोबर से चीजें बनाने पर रिसर्च शुरू किया. दो साल लगातार प्रयोग करने के बाद उन्होंने एक्यूप्रेशर फोल्डेबल गद्दी बनाने में सफलता पाई और इस आइडिया का पेटेंट भी उनके नाम दर्ज हो गया. भारतीय संस्कृति में गाय का गोबर और गोमूत्र सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. पहले घरों की दीवारें और आंगन गोबर से लीपे जाते थे. इन्हीं गुणों का अध्ययन कर गोबर से बनी रंगोली, आसन, लैंप और कई उपयोगी चीजों को ग्राहकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला.
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पुणे की एक महिला ने बैंक की नौकरी छोड़कर गोबर-मिट्टी से चीजें बनाने का बिजनेस शुरू किया. अब उनकी लाखों की कमाई हो रही है.
पारंपरिक नौकरी की सीमा तोड़कर अपनी नई सोच को हकीकत में बदलने वालों की संख्या बढ़ रही है. इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं धनकवड़ी की देवयानी हैं, जिन्होंने बैंक की 40 हजार की स्थायी नौकरी छोड़कर ‘माय माटी’ नाम से एक अनोखा और पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस शुरू किया. उन्होंने गाय के गोबर से गद्दी, रंगोली, आसन, दीये और खास लैब-टेस्टेड मिट्टी से किचन के बर्तन और पानी के मटके बनाकर एक अलग तरह की पहल की है.
बचपन से ही नेचुरोपैथी, मिट्टी और पारंपरिक तरीकों में रुचि रखने वाली देवयानी तांबोळी करीब आठ साल बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुकी थीं. लेकिन कुछ अलग और फायदेमंद करने की चाह में उन्होंने चार साल पहले नौकरी छोड़ दी. इसके बाद ‘मिट्टी हब’ ब्रांड के तहत मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाने का प्रयोग शुरू किया. लैब में टेस्ट की गई मिट्टी से बने किचन के सामान जब ग्राहकों तक पहुंचे तो उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला.
इसी प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए उन्होंने गाय के गोबर से चीजें बनाने पर रिसर्च शुरू किया. दो साल लगातार प्रयोग करने के बाद उन्होंने एक्यूप्रेशर फोल्डेबल गद्दी बनाने में सफलता पाई और इस आइडिया का पेटेंट भी उनके नाम दर्ज हो गया. भारतीय संस्कृति में गाय का गोबर और गोमूत्र सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. पहले घरों की दीवारें और आंगन गोबर से लीपे जाते थे. इन्हीं गुणों का अध्ययन कर गोबर से बनी रंगोली, आसन, लैंप और कई उपयोगी चीजों को ग्राहकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला.
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पुणे की एक महिला ने बैंक की नौकरी छोड़कर गोबर-मिट्टी से चीजें बनाने का बिजनेस शुरू किया. अब उनकी लाखों की कमाई हो रही है.
पारंपरिक नौकरी की सीमा तोड़कर अपनी नई सोच को हकीकत में बदलने वालों की संख्या बढ़ रही है. इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं धनकवड़ी की देवयानी हैं, जिन्होंने बैंक की 40 हजार की स्थायी नौकरी छोड़कर ‘माय माटी’ नाम से एक अनोखा और पर्यावरण के अनुकूल बिजनेस शुरू किया. उन्होंने गाय के गोबर से गद्दी, रंगोली, आसन, दीये और खास लैब-टेस्टेड मिट्टी से किचन के बर्तन और पानी के मटके बनाकर एक अलग तरह की पहल की है.
बचपन से ही नेचुरोपैथी, मिट्टी और पारंपरिक तरीकों में रुचि रखने वाली देवयानी तांबोळी करीब आठ साल बैंकिंग सेक्टर में काम कर चुकी थीं. लेकिन कुछ अलग और फायदेमंद करने की चाह में उन्होंने चार साल पहले नौकरी छोड़ दी. इसके बाद ‘मिट्टी हब’ ब्रांड के तहत मिट्टी से अलग-अलग बर्तन बनाने का प्रयोग शुरू किया. लैब में टेस्ट की गई मिट्टी से बने किचन के सामान जब ग्राहकों तक पहुंचे तो उन्हें अच्छा रिस्पॉन्स मिला.
इसी प्रक्रिया में आगे बढ़ते हुए उन्होंने गाय के गोबर से चीजें बनाने पर रिसर्च शुरू किया. दो साल लगातार प्रयोग करने के बाद उन्होंने एक्यूप्रेशर फोल्डेबल गद्दी बनाने में सफलता पाई और इस आइडिया का पेटेंट भी उनके नाम दर्ज हो गया. भारतीय संस्कृति में गाय का गोबर और गोमूत्र सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. पहले घरों की दीवारें और आंगन गोबर से लीपे जाते थे. इन्हीं गुणों का अध्ययन कर गोबर से बनी रंगोली, आसन, लैंप और कई उपयोगी चीजों को ग्राहकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला.
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