संक्षेप: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंक दी है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था।छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंकने का काम किया है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाकर छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले इलाके में एक साल का रणनीतिक विस्तार पूरा कर लिया है। इससे नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है। वहीं दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर 65 लाख रुपये का इनाम था।LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएंसरेंडर करने वाले नक्सलियों में 12 महिलाएं भी हैं। ये नक्सली कई मुठभेड़ों में शामिल रहे हैं। कुछ नक्सली मार्च 2020 में ग्राम मिनपा के जंगलों में हुई उस मुठभेड़ में शामिल थे जिसमें 26 जवानों की शहादत हुई थी जबकि 20 जवान घायल हुए थे। इन नक्सलियों की मार्च 2020 की नक्सल हिंसा में भी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। सरेंडर करने वाले कुछ नक्सली साल 2024 ग्राम थूलथूली के मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं।20 महीनों में 508 से अधिक ने डाले हथियारदंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव राय ने बताया कि नक्सलियों ने पूना मारगेम (पुनर्वास नीति) पहल के तहत पुलिस और CRPF के अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की तत्कालिक मदद दी जाएगी। इनको रोजगार के लिए ट्रेनिंग, खेती की जमीन समेत अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दंतेवाड़ा जिले में बीते 20 महीनों में 508 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें से 165 पर इनाम घोषित था।ITBP ने अबूझमाड़ में बनाया बेसइस बीच नक्सलवाद के खिलाफ मुहिम में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। ITBP ने 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले अबूझमाड़ इलाके में लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना की। इसके साथ ही बल का एक साल का स्ट्रेटेजिक विस्तार पूरा हो गया। इस कदम के साथ ही नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है।ये भी पढ़ें:लोकतंत्र में जिहाद की जगह नहीं; मदनी के बयान पर बरसे भाजपा नेता, किसने क्या कहा?ये भी पढ़ें:जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा; मंच से जमीयत चीफ मौलाना मदनी की दो टूकनक्सलियों का आखिरी गढ़ भी ध्वस्तयह आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से 3 महीने से कम समय में बनाया गया 9वां कैंप है। इस इलाके को कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। लंका COB बेस की स्थापना के साथ नक्सलियों का यह कथित आखिरी गढ़ भी ध्वस्त हो गया है। इस बेस को ITBP की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान मिलकर चलाते हैं। यह महाराष्ट्र सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर है।नक्सलियों का इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट ब्लॉकयह इलाका गढ़चिरौली (महाराष्ट्र), बीजापुर (छत्तीसगढ़) और तेलंगाना के आस-पास के इलाकों में नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ता था। अब यहां बेस कैंप बनने से नक्सलियों के इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कामयाबी घने जंगलों में महीनों तक चले ऑपरेशन के बाद आई है। सीनियर नक्सल बसवराजू के बोटर हिल पर मारे जाने के बाद मुहिम में तेजी मिली। इससे इलाके में विकास के काम रफ्तार पकड़ सकेंगे।ये भी पढ़ें:वंदे मातरम इस्लाम के खिलाफ नहीं, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का मदनी पर जोरदार पलटवारये भी पढ़ें:खड़ी मालगाड़ी के नीचे से पार कर रहा था ट्रैक, चल गई ट्रेन बची जान पर कैसे- VIDEOएंट्री प्वाइंट किया सीलएक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ के जंगलों में आईटीबीपी की 44वीं बटालियन की ओर से स्थापित यह कैंप रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। इस बेस ने नक्सलियों के एंट्री प्वाइंट को ही सील कर दिया है। इससे महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिलों के बीच नक्सलियों की आवाजाही और रसद आपूर्ति बाधित हो गई है। इसे एक व्यापक ऐक्शन प्लान के तहत स्थापित किया गया है।ये भी पढ़ें:नोएडा-ग्रेनो निवासी दें ध्यान! SIR के लिए 2 दिन लगेंगे 500 से अधिक स्पेशल कैंपये भी पढ़ें:MP: 7 फेरों से पहले बवाल; मंडप में पहुंची वो और दूल्हे पर जताया हक, आगे क्या हुआअबूझमाड़ क्षेत्र में ITBP का 9वां कैंपअधिकारी ने बताया कि बीते 3 महीनों में अबूझमाड़ क्षेत्र में आईटीबीपी की ओर से बनाया गया यह 9वां कैंप है। अबूझमाड़ क्षेत्र के एडजुम, इदवाया, एडर, कुडमेल, जटलूर, धोबे, डोडी मार्का और पदमेटा में आईटीबीपी के बाकी कैंप हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ये सारे कैंप नक्सलियों की ओर से तेलंगाना, महाराष्ट्र और अबूझमाड़ के बीच लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे कॉरिडोर को बंद करने में सुरक्षा बलों के लिए काफी मददगार होंगे।ये भी पढ़ें:गाजियाबाद में SIR को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती, वजह कर देगी हैरानये भी पढ़ें:दिल्ली-NCR में गिरेगा तापमान बढ़ेगी सर्दी, कैसा रहेगा मौसम, पलूशन पर क्या संकेत?नक्सलियों का गढ़ है यह इलाकाबस्तर में अबूझमाड़ के घने जंगल नक्सलियों के लिए पनाहगाह रहे हैं। इन जंगलों को नक्सली अब तक अभेद किला मानते रहे हैं। इन जंगलों में लगभग 237 गांव हैं जिनमें मुख्यतः आदिवासी रहते हैं।आईटीबीपी ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगभग 8 बटालियनें तैनात की हैं। नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में मार्क किया है।(पीटीआई-भाषा, यूनीवार्ता और एएनआई के इनपुट पर आधारित)
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संक्षेप:
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंक दी है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंकने का काम किया है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाकर छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले इलाके में एक साल का रणनीतिक विस्तार पूरा कर लिया है। इससे नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है। वहीं दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर 65 लाख रुपये का इनाम था।
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सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 12 महिलाएं भी हैं। ये नक्सली कई मुठभेड़ों में शामिल रहे हैं। कुछ नक्सली मार्च 2020 में ग्राम मिनपा के जंगलों में हुई उस मुठभेड़ में शामिल थे जिसमें 26 जवानों की शहादत हुई थी जबकि 20 जवान घायल हुए थे। इन नक्सलियों की मार्च 2020 की नक्सल हिंसा में भी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। सरेंडर करने वाले कुछ नक्सली साल 2024 ग्राम थूलथूली के मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं।
20 महीनों में 508 से अधिक ने डाले हथियार
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव राय ने बताया कि नक्सलियों ने पूना मारगेम (पुनर्वास नीति) पहल के तहत पुलिस और CRPF के अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की तत्कालिक मदद दी जाएगी। इनको रोजगार के लिए ट्रेनिंग, खेती की जमीन समेत अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दंतेवाड़ा जिले में बीते 20 महीनों में 508 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें से 165 पर इनाम घोषित था।
ITBP ने अबूझमाड़ में बनाया बेस
इस बीच नक्सलवाद के खिलाफ मुहिम में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। ITBP ने 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले अबूझमाड़ इलाके में लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना की। इसके साथ ही बल का एक साल का स्ट्रेटेजिक विस्तार पूरा हो गया। इस कदम के साथ ही नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है।
नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी ध्वस्त
यह आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से 3 महीने से कम समय में बनाया गया 9वां कैंप है। इस इलाके को कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। लंका COB बेस की स्थापना के साथ नक्सलियों का यह कथित आखिरी गढ़ भी ध्वस्त हो गया है। इस बेस को ITBP की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान मिलकर चलाते हैं। यह महाराष्ट्र सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर है।
नक्सलियों का इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट ब्लॉक
यह इलाका गढ़चिरौली (महाराष्ट्र), बीजापुर (छत्तीसगढ़) और तेलंगाना के आस-पास के इलाकों में नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ता था। अब यहां बेस कैंप बनने से नक्सलियों के इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कामयाबी घने जंगलों में महीनों तक चले ऑपरेशन के बाद आई है। सीनियर नक्सल बसवराजू के बोटर हिल पर मारे जाने के बाद मुहिम में तेजी मिली। इससे इलाके में विकास के काम रफ्तार पकड़ सकेंगे।
एंट्री प्वाइंट किया सील
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ के जंगलों में आईटीबीपी की 44वीं बटालियन की ओर से स्थापित यह कैंप रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। इस बेस ने नक्सलियों के एंट्री प्वाइंट को ही सील कर दिया है। इससे महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिलों के बीच नक्सलियों की आवाजाही और रसद आपूर्ति बाधित हो गई है। इसे एक व्यापक ऐक्शन प्लान के तहत स्थापित किया गया है।
अबूझमाड़ क्षेत्र में ITBP का 9वां कैंप
अधिकारी ने बताया कि बीते 3 महीनों में अबूझमाड़ क्षेत्र में आईटीबीपी की ओर से बनाया गया यह 9वां कैंप है। अबूझमाड़ क्षेत्र के एडजुम, इदवाया, एडर, कुडमेल, जटलूर, धोबे, डोडी मार्का और पदमेटा में आईटीबीपी के बाकी कैंप हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ये सारे कैंप नक्सलियों की ओर से तेलंगाना, महाराष्ट्र और अबूझमाड़ के बीच लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे कॉरिडोर को बंद करने में सुरक्षा बलों के लिए काफी मददगार होंगे।
नक्सलियों का गढ़ है यह इलाका
बस्तर में अबूझमाड़ के घने जंगल नक्सलियों के लिए पनाहगाह रहे हैं। इन जंगलों को नक्सली अब तक अभेद किला मानते रहे हैं। इन जंगलों में लगभग 237 गांव हैं जिनमें मुख्यतः आदिवासी रहते हैं।आईटीबीपी ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगभग 8 बटालियनें तैनात की हैं। नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में मार्क किया है।
(पीटीआई-भाषा, यूनीवार्ता और एएनआई के इनपुट पर आधारित)
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संक्षेप:
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंक दी है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंकने का काम किया है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाकर छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले इलाके में एक साल का रणनीतिक विस्तार पूरा कर लिया है। इससे नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है। वहीं दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर 65 लाख रुपये का इनाम था।
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सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 12 महिलाएं भी हैं। ये नक्सली कई मुठभेड़ों में शामिल रहे हैं। कुछ नक्सली मार्च 2020 में ग्राम मिनपा के जंगलों में हुई उस मुठभेड़ में शामिल थे जिसमें 26 जवानों की शहादत हुई थी जबकि 20 जवान घायल हुए थे। इन नक्सलियों की मार्च 2020 की नक्सल हिंसा में भी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। सरेंडर करने वाले कुछ नक्सली साल 2024 ग्राम थूलथूली के मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं।
20 महीनों में 508 से अधिक ने डाले हथियार
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव राय ने बताया कि नक्सलियों ने पूना मारगेम (पुनर्वास नीति) पहल के तहत पुलिस और CRPF के अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की तत्कालिक मदद दी जाएगी। इनको रोजगार के लिए ट्रेनिंग, खेती की जमीन समेत अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दंतेवाड़ा जिले में बीते 20 महीनों में 508 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें से 165 पर इनाम घोषित था।
ITBP ने अबूझमाड़ में बनाया बेस
इस बीच नक्सलवाद के खिलाफ मुहिम में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। ITBP ने 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले अबूझमाड़ इलाके में लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना की। इसके साथ ही बल का एक साल का स्ट्रेटेजिक विस्तार पूरा हो गया। इस कदम के साथ ही नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है।
नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी ध्वस्त
यह आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से 3 महीने से कम समय में बनाया गया 9वां कैंप है। इस इलाके को कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। लंका COB बेस की स्थापना के साथ नक्सलियों का यह कथित आखिरी गढ़ भी ध्वस्त हो गया है। इस बेस को ITBP की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान मिलकर चलाते हैं। यह महाराष्ट्र सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर है।
नक्सलियों का इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट ब्लॉक
यह इलाका गढ़चिरौली (महाराष्ट्र), बीजापुर (छत्तीसगढ़) और तेलंगाना के आस-पास के इलाकों में नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ता था। अब यहां बेस कैंप बनने से नक्सलियों के इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कामयाबी घने जंगलों में महीनों तक चले ऑपरेशन के बाद आई है। सीनियर नक्सल बसवराजू के बोटर हिल पर मारे जाने के बाद मुहिम में तेजी मिली। इससे इलाके में विकास के काम रफ्तार पकड़ सकेंगे।
एंट्री प्वाइंट किया सील
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ के जंगलों में आईटीबीपी की 44वीं बटालियन की ओर से स्थापित यह कैंप रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। इस बेस ने नक्सलियों के एंट्री प्वाइंट को ही सील कर दिया है। इससे महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिलों के बीच नक्सलियों की आवाजाही और रसद आपूर्ति बाधित हो गई है। इसे एक व्यापक ऐक्शन प्लान के तहत स्थापित किया गया है।
अबूझमाड़ क्षेत्र में ITBP का 9वां कैंप
अधिकारी ने बताया कि बीते 3 महीनों में अबूझमाड़ क्षेत्र में आईटीबीपी की ओर से बनाया गया यह 9वां कैंप है। अबूझमाड़ क्षेत्र के एडजुम, इदवाया, एडर, कुडमेल, जटलूर, धोबे, डोडी मार्का और पदमेटा में आईटीबीपी के बाकी कैंप हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ये सारे कैंप नक्सलियों की ओर से तेलंगाना, महाराष्ट्र और अबूझमाड़ के बीच लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे कॉरिडोर को बंद करने में सुरक्षा बलों के लिए काफी मददगार होंगे।
नक्सलियों का गढ़ है यह इलाका
बस्तर में अबूझमाड़ के घने जंगल नक्सलियों के लिए पनाहगाह रहे हैं। इन जंगलों को नक्सली अब तक अभेद किला मानते रहे हैं। इन जंगलों में लगभग 237 गांव हैं जिनमें मुख्यतः आदिवासी रहते हैं।आईटीबीपी ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगभग 8 बटालियनें तैनात की हैं। नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में मार्क किया है।
(पीटीआई-भाषा, यूनीवार्ता और एएनआई के इनपुट पर आधारित)
FAQ
8 FAQ in Hindi:
संक्षेप:
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंक दी है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाया है। वहीं दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम था।
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के ताबूत में ITBP ने आखिरी कील ठोंकने का काम किया है। ITBP ने अबूझमाड़ में अपना अहम बेस बनाकर छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले इलाके में एक साल का रणनीतिक विस्तार पूरा कर लिया है। इससे नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है। वहीं दंतेवाड़ा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। दंतेवाड़ा जिले में 37 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया है। इनमें से 27 पर 65 लाख रुपये का इनाम था।
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सरेंडर करने वालों में 12 महिलाएं
सरेंडर करने वाले नक्सलियों में 12 महिलाएं भी हैं। ये नक्सली कई मुठभेड़ों में शामिल रहे हैं। कुछ नक्सली मार्च 2020 में ग्राम मिनपा के जंगलों में हुई उस मुठभेड़ में शामिल थे जिसमें 26 जवानों की शहादत हुई थी जबकि 20 जवान घायल हुए थे। इन नक्सलियों की मार्च 2020 की नक्सल हिंसा में भी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। सरेंडर करने वाले कुछ नक्सली साल 2024 ग्राम थूलथूली के मुठभेड़ों में भी शामिल रहे हैं।
20 महीनों में 508 से अधिक ने डाले हथियार
दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गौरव राय ने बताया कि नक्सलियों ने पूना मारगेम (पुनर्वास नीति) पहल के तहत पुलिस और CRPF के अधिकारियों के सामने सरेंडर किया। सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 50 हजार रुपये की तत्कालिक मदद दी जाएगी। इनको रोजगार के लिए ट्रेनिंग, खेती की जमीन समेत अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। दंतेवाड़ा जिले में बीते 20 महीनों में 508 से अधिक नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। इनमें से 165 पर इनाम घोषित था।
ITBP ने अबूझमाड़ में बनाया बेस
इस बीच नक्सलवाद के खिलाफ मुहिम में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। ITBP ने 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ के घने और मुश्किल पहुंच वाले अबूझमाड़ इलाके में लंका कंपनी ऑपरेटिंग बेस की स्थापना की। इसके साथ ही बल का एक साल का स्ट्रेटेजिक विस्तार पूरा हो गया। इस कदम के साथ ही नक्सलियों का आखिरी बड़ा इंटरस्टेट मूवमेंट कॉरिडोर सील हो गया है।
नक्सलियों का आखिरी गढ़ भी ध्वस्त
यह आईटीबीपी और छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से 3 महीने से कम समय में बनाया गया 9वां कैंप है। इस इलाके को कभी नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। लंका COB बेस की स्थापना के साथ नक्सलियों का यह कथित आखिरी गढ़ भी ध्वस्त हो गया है। इस बेस को ITBP की 44वीं बटालियन, छत्तीसगढ़ पुलिस और डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवान मिलकर चलाते हैं। यह महाराष्ट्र सीमा से महज 3 किलोमीटर दूर है।
नक्सलियों का इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट ब्लॉक
यह इलाका गढ़चिरौली (महाराष्ट्र), बीजापुर (छत्तीसगढ़) और तेलंगाना के आस-पास के इलाकों में नक्सल प्रभावित इलाकों को जोड़ता था। अब यहां बेस कैंप बनने से नक्सलियों के इंटरस्टेट ट्रांजिट रूट को ब्लॉक कर दिया गया है। यह कामयाबी घने जंगलों में महीनों तक चले ऑपरेशन के बाद आई है। सीनियर नक्सल बसवराजू के बोटर हिल पर मारे जाने के बाद मुहिम में तेजी मिली। इससे इलाके में विकास के काम रफ्तार पकड़ सकेंगे।
एंट्री प्वाइंट किया सील
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बस्तर क्षेत्र में अबूझमाड़ के जंगलों में आईटीबीपी की 44वीं बटालियन की ओर से स्थापित यह कैंप रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है। इस बेस ने नक्सलियों के एंट्री प्वाइंट को ही सील कर दिया है। इससे महाराष्ट्र के गढ़चिरोली और छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिलों के बीच नक्सलियों की आवाजाही और रसद आपूर्ति बाधित हो गई है। इसे एक व्यापक ऐक्शन प्लान के तहत स्थापित किया गया है।
अबूझमाड़ क्षेत्र में ITBP का 9वां कैंप
अधिकारी ने बताया कि बीते 3 महीनों में अबूझमाड़ क्षेत्र में आईटीबीपी की ओर से बनाया गया यह 9वां कैंप है। अबूझमाड़ क्षेत्र के एडजुम, इदवाया, एडर, कुडमेल, जटलूर, धोबे, डोडी मार्का और पदमेटा में आईटीबीपी के बाकी कैंप हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ये सारे कैंप नक्सलियों की ओर से तेलंगाना, महाराष्ट्र और अबूझमाड़ के बीच लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे कॉरिडोर को बंद करने में सुरक्षा बलों के लिए काफी मददगार होंगे।
नक्सलियों का गढ़ है यह इलाका
बस्तर में अबूझमाड़ के घने जंगल नक्सलियों के लिए पनाहगाह रहे हैं। इन जंगलों को नक्सली अब तक अभेद किला मानते रहे हैं। इन जंगलों में लगभग 237 गांव हैं जिनमें मुख्यतः आदिवासी रहते हैं।आईटीबीपी ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगभग 8 बटालियनें तैनात की हैं। नारायणपुर जिले का अबूझमाड़ क्षेत्र लगभग 4,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है। सुरक्षा एजेंसियों ने इस क्षेत्र को नक्सलियों के गढ़ के रूप में मार्क किया है।