Constant Fatigue: आज के युवा वर्गों में हरदम थकान महसूस करना काफी आम होता जा रहा है. इसके लिए जब वे ब्लड टेस्ट कराते हैं तो सब कुछ नॉर्मल आता है. इसके बावजूद उन्हें थकान से राहत नहीं मिलती है. कभी-कभी डॉक्टर भी हैरान हो जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखते. थकान के लिए नियमित टेस्ट जैसे कि एनीमिया, थायरॉयड की गड़बड़ियां या डायबिटीज जैसी स्थितियां भी सामान्य रहता है. कई लोग मानते हैं कि यदि उनके बेसिक ब्लड टेस्ट सामान्य हैं तो उनकी थकान या तो मानसिक होगी या फिर कोई मामूली बात. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि थकान एक जटिल लक्षण है जिस पर शारीरिक, भावनात्मक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक असर डालते हैं. अगर मानक टेस्ट में भी इसका पता नहीं चलता तो इसका मतलब है कि इसके कारण छिपे हुए है.
ये हैं छिपे हुए कारण
तनाव और गुणवत्ता वाली नींद की कमी –मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन और एग्ज़िक्यूटिव हेल्थ चेक-अप विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संदीप दोशी बताते हैं कि अगर इसका सामान्य टेस्ट से पता नहीं चलता और इसके बावजूद लगातार थकान रहती है तो इसका मतलब है कि आपकी तनाव और खराब नींद की गुणवत्ता छिपा हुआ कारण है. डॉ. दोशी ने बताया कि छिपे हुए कारणों में लगातार तनाव में रहना बहुत बड़ा कारण है. इसके अलावा सात से आठ घंटे की नींद लेने के बावजूद कई लोग थकान महसूस करते हुए उठते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि यहां समस्या नींद की अवधि नहीं,बल्कि उसकी गुणवत्ता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. देर रात तक स्क्रीन देखना, काम करने का अनियमित समय और लगातार दिमाग का सक्रिय बना रहना नींद के कुदरती चक्र को बिगाड़ देता है. इससे गहरी, पुनर्स्थापित करने वाली नींद कम हो जाती है और व्यक्ति सुबह उठते ही थकान महसूस करता है.
हॉर्मोनल बदलाव जो सामान्य टेस्ट नहीं पकड़ पाते- डॉ. दोशी ने बताया कि जीवनशैली से जुड़े हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव भी अकारण थकान के बड़े कारण बनकर उभर रहे हैं. तनाव, पर्याप्त नींद का न होना और अनियमित भोजन के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन में असंतुलन हो सकता है, जिससे लगातार ऊर्जा कम महसूस होती रहती है. ये बदलाव बेसिक लैब टेस्ट में दिखाई नहीं देते. इसलिए लोगों को अक्सर कहा जाता है कि रिपोर्ट सामान्य है जबकि असली समस्या बनी रहती है.
माइक्रो पोषण की जरूरत –डॉ. संदीप दोशी ने बताया कि आजकल अधिकांश लोगों में माइक्रोन्यूट्रेंट्स की कमी दिखाई देती है. अक्सर विटामिन डी, विटामिन B12 और मैग्नीशियम की हल्की कमी अक्सर उन लोगों में पाई जा रही है जो लगातार थकान की शिकायत करते हैं. इसमें रिपोर्ट आमतौर पर नॉर्मल या बॉर्डरलाइन पर होती है. इससे एनर्जी में कमी और मूड और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में कमी आने लगती है. जो लोग कुदरती डाइट के बजाय बाहर के प्रोसेस्ड डाइट पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उनमें यह समस्याएं रहती हैं.
कम पहचाना जाने वाला पैटर्न-इस मौसम में फ्लू जैसे संक्रमणों, लंबे समय तक रहने वाली खांसी और बुखार जैसी वायरल बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई. बाहरी लक्षण ठीक हो जाने के बाद भी कई लोग असामान्य रूप से थका हुआ महसूस करते रहते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि वायरस के बाद होने वाली सूजन और इम्यून सिस्टम की रिकवरी में कई सप्ताह लग सकते हैं, जिसके दौरान रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है.
भावनात्मक दबाव, चिंता और अवसाद –यह सबसे खतरनाक कारण है. अक्सर लोग किसी न किसी वजह से भावनात्मक दबाव, चिंता और हल्के स्तर का अवसाद अक्सर शारीरिक थकान के रूप में सामने आता है. हाल के दिनों में डॉक्टरों ने ऐसे अधिक लोगों को देखा है जो थकान, ध्यान की कमी और ऊर्जा घटने की शिकायत लेकर आते हैं लेकिन यह पहचान नहीं पाते कि इसकी जड़ें मानसिक स्वास्थ्य में छिपी हैं.
इस थकान से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टर बताते हैं कि यदि आपकी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद आपको लगातार थकान महसूस हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है. कई तरह के हार्मोन की जांच करें और सबसे पहले देखें कि आप सुकून भरी नींद ले पाते हैं या रात को बार-बार नींद में खलल पड़ती है. इनकी मेडिकल जांच सामान्य नहीं है, इसलिए लक्षणों पर इसकी पहचान करें. इसके बाद सुकून भरी नींद के लिए प्रयास करें और तनाव का स्तर को घटाएं. इसके साथ ही सही पोषण के लिए कुदरती चीजों का सहारा लें. भोजन में हरी साग-सब्जी, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सहारा लें. आजकल स्क्रीन टाइम सबसे बड़ी समस्या है. स्क्रीन टाइम पूरी तरह घटा दें. रात में सोने से आधा घंटा पहले स्क्रीन को छोड़ दें. विटामिन की कमी हो तो इसके लिए कुदरती खान-पान का सहारा लें.
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Constant Fatigue: आज के युवा वर्गों में हरदम थकान महसूस करना काफी आम होता जा रहा है. इसके लिए जब वे ब्लड टेस्ट कराते हैं तो सब कुछ नॉर्मल आता है. इसके बावजूद उन्हें थकान से राहत नहीं मिलती है. कभी-कभी डॉक्टर भी हैरान हो जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखते. थकान के लिए नियमित टेस्ट जैसे कि एनीमिया, थायरॉयड की गड़बड़ियां या डायबिटीज जैसी स्थितियां भी सामान्य रहता है. कई लोग मानते हैं कि यदि उनके बेसिक ब्लड टेस्ट सामान्य हैं तो उनकी थकान या तो मानसिक होगी या फिर कोई मामूली बात. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि थकान एक जटिल लक्षण है जिस पर शारीरिक, भावनात्मक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक असर डालते हैं. अगर मानक टेस्ट में भी इसका पता नहीं चलता तो इसका मतलब है कि इसके कारण छिपे हुए है.
ये हैं छिपे हुए कारण
तनाव और गुणवत्ता वाली नींद की कमी –मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन और एग्ज़िक्यूटिव हेल्थ चेक-अप विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संदीप दोशी बताते हैं कि अगर इसका सामान्य टेस्ट से पता नहीं चलता और इसके बावजूद लगातार थकान रहती है तो इसका मतलब है कि आपकी तनाव और खराब नींद की गुणवत्ता छिपा हुआ कारण है. डॉ. दोशी ने बताया कि छिपे हुए कारणों में लगातार तनाव में रहना बहुत बड़ा कारण है. इसके अलावा सात से आठ घंटे की नींद लेने के बावजूद कई लोग थकान महसूस करते हुए उठते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि यहां समस्या नींद की अवधि नहीं,बल्कि उसकी गुणवत्ता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. देर रात तक स्क्रीन देखना, काम करने का अनियमित समय और लगातार दिमाग का सक्रिय बना रहना नींद के कुदरती चक्र को बिगाड़ देता है. इससे गहरी, पुनर्स्थापित करने वाली नींद कम हो जाती है और व्यक्ति सुबह उठते ही थकान महसूस करता है.
हॉर्मोनल बदलाव जो सामान्य टेस्ट नहीं पकड़ पाते- डॉ. दोशी ने बताया कि जीवनशैली से जुड़े हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव भी अकारण थकान के बड़े कारण बनकर उभर रहे हैं. तनाव, पर्याप्त नींद का न होना और अनियमित भोजन के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन में असंतुलन हो सकता है, जिससे लगातार ऊर्जा कम महसूस होती रहती है. ये बदलाव बेसिक लैब टेस्ट में दिखाई नहीं देते. इसलिए लोगों को अक्सर कहा जाता है कि रिपोर्ट सामान्य है जबकि असली समस्या बनी रहती है.
माइक्रो पोषण की जरूरत –डॉ. संदीप दोशी ने बताया कि आजकल अधिकांश लोगों में माइक्रोन्यूट्रेंट्स की कमी दिखाई देती है. अक्सर विटामिन डी, विटामिन B12 और मैग्नीशियम की हल्की कमी अक्सर उन लोगों में पाई जा रही है जो लगातार थकान की शिकायत करते हैं. इसमें रिपोर्ट आमतौर पर नॉर्मल या बॉर्डरलाइन पर होती है. इससे एनर्जी में कमी और मूड और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में कमी आने लगती है. जो लोग कुदरती डाइट के बजाय बाहर के प्रोसेस्ड डाइट पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उनमें यह समस्याएं रहती हैं.
कम पहचाना जाने वाला पैटर्न-इस मौसम में फ्लू जैसे संक्रमणों, लंबे समय तक रहने वाली खांसी और बुखार जैसी वायरल बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई. बाहरी लक्षण ठीक हो जाने के बाद भी कई लोग असामान्य रूप से थका हुआ महसूस करते रहते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि वायरस के बाद होने वाली सूजन और इम्यून सिस्टम की रिकवरी में कई सप्ताह लग सकते हैं, जिसके दौरान रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है.
भावनात्मक दबाव, चिंता और अवसाद –यह सबसे खतरनाक कारण है. अक्सर लोग किसी न किसी वजह से भावनात्मक दबाव, चिंता और हल्के स्तर का अवसाद अक्सर शारीरिक थकान के रूप में सामने आता है. हाल के दिनों में डॉक्टरों ने ऐसे अधिक लोगों को देखा है जो थकान, ध्यान की कमी और ऊर्जा घटने की शिकायत लेकर आते हैं लेकिन यह पहचान नहीं पाते कि इसकी जड़ें मानसिक स्वास्थ्य में छिपी हैं.
इस थकान से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टर बताते हैं कि यदि आपकी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद आपको लगातार थकान महसूस हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है. कई तरह के हार्मोन की जांच करें और सबसे पहले देखें कि आप सुकून भरी नींद ले पाते हैं या रात को बार-बार नींद में खलल पड़ती है. इनकी मेडिकल जांच सामान्य नहीं है, इसलिए लक्षणों पर इसकी पहचान करें. इसके बाद सुकून भरी नींद के लिए प्रयास करें और तनाव का स्तर को घटाएं. इसके साथ ही सही पोषण के लिए कुदरती चीजों का सहारा लें. भोजन में हरी साग-सब्जी, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सहारा लें. आजकल स्क्रीन टाइम सबसे बड़ी समस्या है. स्क्रीन टाइम पूरी तरह घटा दें. रात में सोने से आधा घंटा पहले स्क्रीन को छोड़ दें. विटामिन की कमी हो तो इसके लिए कुदरती खान-पान का सहारा लें.
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Constant Fatigue: आज के युवा वर्गों में हरदम थकान महसूस करना काफी आम होता जा रहा है. इसके लिए जब वे ब्लड टेस्ट कराते हैं तो सब कुछ नॉर्मल आता है. इसके बावजूद उन्हें थकान से राहत नहीं मिलती है. कभी-कभी डॉक्टर भी हैरान हो जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखते. थकान के लिए नियमित टेस्ट जैसे कि एनीमिया, थायरॉयड की गड़बड़ियां या डायबिटीज जैसी स्थितियां भी सामान्य रहता है. कई लोग मानते हैं कि यदि उनके बेसिक ब्लड टेस्ट सामान्य हैं तो उनकी थकान या तो मानसिक होगी या फिर कोई मामूली बात. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि थकान एक जटिल लक्षण है जिस पर शारीरिक, भावनात्मक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक असर डालते हैं. अगर मानक टेस्ट में भी इसका पता नहीं चलता तो इसका मतलब है कि इसके कारण छिपे हुए है.
ये हैं छिपे हुए कारण
तनाव और गुणवत्ता वाली नींद की कमी –मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन और एग्ज़िक्यूटिव हेल्थ चेक-अप विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संदीप दोशी बताते हैं कि अगर इसका सामान्य टेस्ट से पता नहीं चलता और इसके बावजूद लगातार थकान रहती है तो इसका मतलब है कि आपकी तनाव और खराब नींद की गुणवत्ता छिपा हुआ कारण है. डॉ. दोशी ने बताया कि छिपे हुए कारणों में लगातार तनाव में रहना बहुत बड़ा कारण है. इसके अलावा सात से आठ घंटे की नींद लेने के बावजूद कई लोग थकान महसूस करते हुए उठते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि यहां समस्या नींद की अवधि नहीं,बल्कि उसकी गुणवत्ता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. देर रात तक स्क्रीन देखना, काम करने का अनियमित समय और लगातार दिमाग का सक्रिय बना रहना नींद के कुदरती चक्र को बिगाड़ देता है. इससे गहरी, पुनर्स्थापित करने वाली नींद कम हो जाती है और व्यक्ति सुबह उठते ही थकान महसूस करता है.
हॉर्मोनल बदलाव जो सामान्य टेस्ट नहीं पकड़ पाते- डॉ. दोशी ने बताया कि जीवनशैली से जुड़े हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव भी अकारण थकान के बड़े कारण बनकर उभर रहे हैं. तनाव, पर्याप्त नींद का न होना और अनियमित भोजन के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन में असंतुलन हो सकता है, जिससे लगातार ऊर्जा कम महसूस होती रहती है. ये बदलाव बेसिक लैब टेस्ट में दिखाई नहीं देते. इसलिए लोगों को अक्सर कहा जाता है कि रिपोर्ट सामान्य है जबकि असली समस्या बनी रहती है.
माइक्रो पोषण की जरूरत –डॉ. संदीप दोशी ने बताया कि आजकल अधिकांश लोगों में माइक्रोन्यूट्रेंट्स की कमी दिखाई देती है. अक्सर विटामिन डी, विटामिन B12 और मैग्नीशियम की हल्की कमी अक्सर उन लोगों में पाई जा रही है जो लगातार थकान की शिकायत करते हैं. इसमें रिपोर्ट आमतौर पर नॉर्मल या बॉर्डरलाइन पर होती है. इससे एनर्जी में कमी और मूड और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में कमी आने लगती है. जो लोग कुदरती डाइट के बजाय बाहर के प्रोसेस्ड डाइट पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उनमें यह समस्याएं रहती हैं.
कम पहचाना जाने वाला पैटर्न-इस मौसम में फ्लू जैसे संक्रमणों, लंबे समय तक रहने वाली खांसी और बुखार जैसी वायरल बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई. बाहरी लक्षण ठीक हो जाने के बाद भी कई लोग असामान्य रूप से थका हुआ महसूस करते रहते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि वायरस के बाद होने वाली सूजन और इम्यून सिस्टम की रिकवरी में कई सप्ताह लग सकते हैं, जिसके दौरान रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है.
भावनात्मक दबाव, चिंता और अवसाद –यह सबसे खतरनाक कारण है. अक्सर लोग किसी न किसी वजह से भावनात्मक दबाव, चिंता और हल्के स्तर का अवसाद अक्सर शारीरिक थकान के रूप में सामने आता है. हाल के दिनों में डॉक्टरों ने ऐसे अधिक लोगों को देखा है जो थकान, ध्यान की कमी और ऊर्जा घटने की शिकायत लेकर आते हैं लेकिन यह पहचान नहीं पाते कि इसकी जड़ें मानसिक स्वास्थ्य में छिपी हैं.
इस थकान से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टर बताते हैं कि यदि आपकी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद आपको लगातार थकान महसूस हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है. कई तरह के हार्मोन की जांच करें और सबसे पहले देखें कि आप सुकून भरी नींद ले पाते हैं या रात को बार-बार नींद में खलल पड़ती है. इनकी मेडिकल जांच सामान्य नहीं है, इसलिए लक्षणों पर इसकी पहचान करें. इसके बाद सुकून भरी नींद के लिए प्रयास करें और तनाव का स्तर को घटाएं. इसके साथ ही सही पोषण के लिए कुदरती चीजों का सहारा लें. भोजन में हरी साग-सब्जी, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सहारा लें. आजकल स्क्रीन टाइम सबसे बड़ी समस्या है. स्क्रीन टाइम पूरी तरह घटा दें. रात में सोने से आधा घंटा पहले स्क्रीन को छोड़ दें. विटामिन की कमी हो तो इसके लिए कुदरती खान-पान का सहारा लें.
FAQ
10 FAQ in Hindi:
Constant Fatigue: आज के युवा वर्गों में हरदम थकान महसूस करना काफी आम होता जा रहा है. इसके लिए जब वे ब्लड टेस्ट कराते हैं तो सब कुछ नॉर्मल आता है. इसके बावजूद उन्हें थकान से राहत नहीं मिलती है. कभी-कभी डॉक्टर भी हैरान हो जाता है क्योंकि इसके कोई स्पष्ट कारण नहीं दिखते. थकान के लिए नियमित टेस्ट जैसे कि एनीमिया, थायरॉयड की गड़बड़ियां या डायबिटीज जैसी स्थितियां भी सामान्य रहता है. कई लोग मानते हैं कि यदि उनके बेसिक ब्लड टेस्ट सामान्य हैं तो उनकी थकान या तो मानसिक होगी या फिर कोई मामूली बात. लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि थकान एक जटिल लक्षण है जिस पर शारीरिक, भावनात्मक और जीवनशैली से जुड़े कई कारक असर डालते हैं. अगर मानक टेस्ट में भी इसका पता नहीं चलता तो इसका मतलब है कि इसके कारण छिपे हुए है.
ये हैं छिपे हुए कारण
तनाव और गुणवत्ता वाली नींद की कमी –मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन और एग्ज़िक्यूटिव हेल्थ चेक-अप विभाग के कंसल्टेंट डॉ. संदीप दोशी बताते हैं कि अगर इसका सामान्य टेस्ट से पता नहीं चलता और इसके बावजूद लगातार थकान रहती है तो इसका मतलब है कि आपकी तनाव और खराब नींद की गुणवत्ता छिपा हुआ कारण है. डॉ. दोशी ने बताया कि छिपे हुए कारणों में लगातार तनाव में रहना बहुत बड़ा कारण है. इसके अलावा सात से आठ घंटे की नींद लेने के बावजूद कई लोग थकान महसूस करते हुए उठते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि यहां समस्या नींद की अवधि नहीं,बल्कि उसकी गुणवत्ता है. इसके कई कारण हो सकते हैं. देर रात तक स्क्रीन देखना, काम करने का अनियमित समय और लगातार दिमाग का सक्रिय बना रहना नींद के कुदरती चक्र को बिगाड़ देता है. इससे गहरी, पुनर्स्थापित करने वाली नींद कम हो जाती है और व्यक्ति सुबह उठते ही थकान महसूस करता है.
हॉर्मोनल बदलाव जो सामान्य टेस्ट नहीं पकड़ पाते- डॉ. दोशी ने बताया कि जीवनशैली से जुड़े हॉर्मोनल उतार-चढ़ाव भी अकारण थकान के बड़े कारण बनकर उभर रहे हैं. तनाव, पर्याप्त नींद का न होना और अनियमित भोजन के कारण कॉर्टिसोल हार्मोन में असंतुलन हो सकता है, जिससे लगातार ऊर्जा कम महसूस होती रहती है. ये बदलाव बेसिक लैब टेस्ट में दिखाई नहीं देते. इसलिए लोगों को अक्सर कहा जाता है कि रिपोर्ट सामान्य है जबकि असली समस्या बनी रहती है.
माइक्रो पोषण की जरूरत –डॉ. संदीप दोशी ने बताया कि आजकल अधिकांश लोगों में माइक्रोन्यूट्रेंट्स की कमी दिखाई देती है. अक्सर विटामिन डी, विटामिन B12 और मैग्नीशियम की हल्की कमी अक्सर उन लोगों में पाई जा रही है जो लगातार थकान की शिकायत करते हैं. इसमें रिपोर्ट आमतौर पर नॉर्मल या बॉर्डरलाइन पर होती है. इससे एनर्जी में कमी और मूड और मांसपेशियों की कार्यक्षमता में कमी आने लगती है. जो लोग कुदरती डाइट के बजाय बाहर के प्रोसेस्ड डाइट पर ज्यादा निर्भर रहते हैं, उनमें यह समस्याएं रहती हैं.
कम पहचाना जाने वाला पैटर्न-इस मौसम में फ्लू जैसे संक्रमणों, लंबे समय तक रहने वाली खांसी और बुखार जैसी वायरल बीमारियों में तेज़ बढ़ोतरी देखी गई. बाहरी लक्षण ठीक हो जाने के बाद भी कई लोग असामान्य रूप से थका हुआ महसूस करते रहते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि वायरस के बाद होने वाली सूजन और इम्यून सिस्टम की रिकवरी में कई सप्ताह लग सकते हैं, जिसके दौरान रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद थकान लगातार बनी रहती है.
भावनात्मक दबाव, चिंता और अवसाद –यह सबसे खतरनाक कारण है. अक्सर लोग किसी न किसी वजह से भावनात्मक दबाव, चिंता और हल्के स्तर का अवसाद अक्सर शारीरिक थकान के रूप में सामने आता है. हाल के दिनों में डॉक्टरों ने ऐसे अधिक लोगों को देखा है जो थकान, ध्यान की कमी और ऊर्जा घटने की शिकायत लेकर आते हैं लेकिन यह पहचान नहीं पाते कि इसकी जड़ें मानसिक स्वास्थ्य में छिपी हैं.
इस थकान से बचने के लिए क्या करें
डॉक्टर बताते हैं कि यदि आपकी रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद आपको लगातार थकान महसूस हो रही है तो इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है. कई तरह के हार्मोन की जांच करें और सबसे पहले देखें कि आप सुकून भरी नींद ले पाते हैं या रात को बार-बार नींद में खलल पड़ती है. इनकी मेडिकल जांच सामान्य नहीं है, इसलिए लक्षणों पर इसकी पहचान करें. इसके बाद सुकून भरी नींद के लिए प्रयास करें और तनाव का स्तर को घटाएं. इसके साथ ही सही पोषण के लिए कुदरती चीजों का सहारा लें. भोजन में हरी साग-सब्जी, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सहारा लें. आजकल स्क्रीन टाइम सबसे बड़ी समस्या है. स्क्रीन टाइम पूरी तरह घटा दें. रात में सोने से आधा घंटा पहले स्क्रीन को छोड़ दें. विटामिन की कमी हो तो इसके लिए कुदरती खान-पान का सहारा लें.