
ट्रिश प्रॉसर एनल कैंसर के इलाज के 6 साल बाद भी असहनीय पीड़ा में हैं। पेल्विक रेडियोथेरेपी ने उनका जीवन बदल दिया है।
ट्रिश को अपने कैंसर के प्रकार के बारे में बताने में शर्म महसूस होती थी। उन्हें लगा कि एनल कैंसर को लेकर समाज में गहरा कलंक है।
एनल कैंसर एक दुर्लभ बीमारी है, जिसके लगभग 90% मामले एचपीवी संक्रमण से जुड़े होते हैं। यह कोशिकाओं के असामान्य विकास का कारण बनता है।
ट्रिश को थकान और गुदा में खुजली जैसे असामान्य लक्षण थे। उन्हें 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कैंसर का पता चला।
बाहर से ट्रिश सामान्य दिखती थीं, लेकिन अंदर से वह बिखर रही थीं। उनका कहना है कि "रिकवरी पहला पड़ाव है, जो सालों ले सकता है।"
पेल्विक रेडियोथेरेपी से आंत और वजाइना में गहरे घाव हो जाते हैं। इससे वजाइनल वॉल्स सिकुड़ जाती हैं, जो बेहद दर्दनाक है।
इलाज के बाद वजाइनल वॉल्स चिपक सकती हैं, जिससे शारीरिक संबंध बेहद दर्दनाक हो जाते हैं। धैर्यवान साथी का होना महत्वपूर्ण है।
उत्तरी आयरलैंड में पेल्विक रेडियोथेरेपी के बाद एकीकृत देखभाल सुविधाएँ नहीं हैं। इससे कई मरीजों को लंबा और कठिन सफर तय करना पड़ता है।
ट्रिश गुप्तांगों से जुड़ी समस्याओं पर बात करने का टैबू तोड़ना चाहती हैं। वे बेहतर देखभाल व्यवस्था की वकालत कर रही हैं।
ट्रिश की कहानी हमें साहस और धैर्य का महत्व बताती है। उम्मीद है कि उनकी आवाज कई और लोगों को मदद करेगी।