
आज के दौर में कर्ज लेना बहुत आसान हो गया है। बस एक टैप या स्वाइप से तुरंत पैसे मिल जाते हैं।
शुरुआत में ज़ीरो परसेंट इंटरेस्ट का वादा लुभावना लगता है। पर पेमेंट मिस होते ही भारी ब्याज और जुर्माना लगता है।
BNPL से खरीदारी, छोटा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड बिल... ये छोटे कर्ज अकेले समस्या नहीं लगते।
जब ये सब कर्ज जुड़ते हैं, तो बजट पर दबाव बहुत बढ़ता है। युवाओं को कुल कर्ज की सही जानकारी नहीं होती।
एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लेना पड़ता है। यहीं से शुरू होता है कर्ज का जाल (डेट ट्रैप)।
सोशल मीडिया पर दिखावे के चक्कर में खर्च बढ़ जाता है। आसान क्रेडिट 'अभी मजे करो, बाद में चुकाओ' का भ्रम देता है।
अगर आप एक लोन चुकाने के लिए दूसरा ले रहे हैं, या कुल कर्ज नहीं जानते, तो संभल जाएं। क्रेडिट कार्ड बिल को EMI में बदलना भी खतरे का संकेत है।
सिर्फ 'मिनिमम ड्यू' चुकाना, पेमेंट रिमाइंडर से तनाव, या रोजमर्रा के खर्चों के लिए 'पे लेटर' का सहारा लेना खतरे की घंटी है।
अपनी वित्तीय स्थिति को पहचानें। बजट बनाएं, खर्चों पर नियंत्रण रखें और समझदारी से फैसले लें।
कर्ज के जाल से बाहर निकलने के लिए पहला कदम समस्या को पहचानना है। वित्तीय सलाह लें और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ें।