
ब्रह्मांड में मिला एक ऐसा सिस्टम, जो हमारे सौर मंडल के जन्म की कहानी दोहरा रहा है। है ना कमाल?
WISPIT 2 नाम के एक युवा तारे के चारों ओर बन रहे हैं दो नए ग्रह। यह खोज हमें पृथ्वी के अतीत को समझने में मदद करती है।
ये अद्भुत तस्वीरें ESO के शक्तिशाली वेरी लार्ज टेलीस्कोप (VLT) से ली गई हैं। वैज्ञानिकों ने बारीकियों को समझा है।
सबसे पहले WISPIT 2b नामक ग्रह मिला। यह बृहस्पति से 5 गुना बड़ा, अपने तारे से पृथ्वी-सूर्य की 60 गुना दूरी पर है।
हाल ही में WISPIT 2c की पुष्टि हुई। यह WISPIT 2b से दोगुना भारी और तारे के चार गुना ज्यादा करीब है। दोनों गैस के गोले हैं।
WISPIT 2 के चारों ओर धूल की डिस्क में खाली जगहें (Gaps) और छल्ले (Rings) दिखे हैं। ये कई ग्रहों के बनने का संकेत हैं।
धूल और गैस के कण जुड़कर बड़े पिंड बनते हैं। फिर उनकी ग्रैविटी आसपास के मलबे को खींचती है, जिससे गैप बनते हैं।
क्लो लॉलर के मुताबिक, बाहरी हिस्से में एक और गैप है। वैज्ञानिकों को शक है कि वहां शनि के आकार का तीसरा ग्रह भी बन रहा है।
WISPIT 2 हमारे अतीत को देखने का अब तक का सबसे बेहतरीन जरिया है। यह हमें सिखाता है कि हमारी पृथ्वी कैसे बनी होगी!