
ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर नया 'कमीशन' लगाने जा रहा है। यह दुनियाभर के व्यापारिक मार्गों के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है।
कूटनीतिक हलकों और पश्चिमी मीडिया ने ईरान के इस कदम को 'गुंडा टैक्स' करार दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान के ताकतवर सांसद अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने इस टैक्स के बारे में अहम संकेत दिए हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के सदस्य हैं।
बोरौजेर्दी के मुताबिक, ईरान हर जहाज से 20 लाख डॉलर वसूल सकता है। यह रकम होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए चुकानी होगी।
ईरान के लिए यह सिर्फ पैसा कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि अपनी सत्ता और संप्रभुता का प्रतीक है। यह क्षेत्र पर उसके हक को दर्शाता है।
बोरौजेर्दी ने दावा किया कि 47 साल बाद ईरान ने होर्मुज पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। इसका मतलब है कि ईरान इसे अपनी जागीर समझता है।
ईरान का इरादा इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को अपनी निजी जागीर की तरह कंट्रोल करना है। जो भी देश इस रास्ते से जाएगा, उसे कीमत चुकानी होगी।
ये बयान ऐसे समय आए हैं जब ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे में होर्मुज खाली करने की धमकी दी थी। उन्होंने बिना शर्त रास्ता खोलने को कहा।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना, तो अमेरिकी सेना ईरानी बिजली संयंत्रों को निशाना बनाएगी। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर होगा।
अमेरिका की धमकी का ईरान पर कोई असर नहीं हुआ, बल्कि तल्खी और बढ़ गई। ईरान ने इसका खतरनाक जवाब देने की कसम खाई है।
ईरान ने कहा कि अगर हमला हुआ, तो वह पूरे मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिका और इज़राइल के प्रतिष्ठानों को मलबे में बदल देगा। यह एक गंभीर चेतावनी है।
होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव से वैश्विक शांति को खतरा है। तेल व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर बड़ा असर पड़ सकता है।