
ईरान ने अमेरिका को वियतनाम युद्ध की याद दिलाकर घेरा। कहा, "जीत के झूठे दावे बंद करो।"
अब्बास अराघची ने कहा, आज की स्थिति वियतनाम युद्ध जैसी है। अमेरिका के दावे जमीन से अलग हैं।
वियतनाम में अमेरिका बार-बार जीत का दावा करता था। लेकिन असलियत कुछ और ही थी।
1960 के दशक में साइगोन में ऐसी प्रेस ब्रीफिंग होती थीं। अमेरिकी सेना जीत का ढोंग करती थी।
जनरल विलियम वेस्टमोरलैंड ने कहा था जीत करीब है। पर 1968 में टेट आक्रामक ने सच्चाई बताई।
अराघची बोले, आज भी अमेरिका कुछ ऐसा ही दावा कर रहा है। सरकार जीत रही है कहती है।
अमेरिकी सरकार जीत का दावा करती है। लेकिन जमीन पर हालात अलग और चिंताजनक हैं।
ईरान ने F-35 लाइटनिंग II को नुकसान पहुंचने का दावा किया। अमेरिकी युद्धपोत भी पीछे हटते दिखे।
अमेरिका ने कहा F-35 सुरक्षित उतरा और मामले की जांच चल रही है।
डोनाल्ड ट्रंप को देश में आलोचना मिली। रक्षा मंत्री हेगसेथ बोले अमेरिका जीत रहा है, ईरान कमजोर है।
अमेरिका ने लाखों सैनिक भेजे, भारी बमबारी की। अंत में उसे पीछे हटना पड़ा।
वियतनाम युद्ध में 58,000+ अमेरिकी सैनिक मरे। 20-30 लाख वियतनामी लोगों की जान गई।
1975 में युद्ध खत्म हुआ, उत्तर वियतनाम जीता। अमेरिका को अपनी हार माननी पड़ी।
अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मरे, 200 घायल। ईरान में 1400+ मौतें, 18,000 घायल बताए जा रहे हैं।
क्या अमेरिका को वियतनाम युद्ध से सबक लेना चाहिए था?
सिर्फ 'हम जीत रहे हैं' कहने से हालात नहीं बदलते। जमीनी सच्चाई देखें, नहीं तो वियतनाम जैसी स्थिति होगी।