
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा, ईरान युद्ध से हालात चिंताजनक हैं। भारत के सामने अप्रत्याशित चुनौतियाँ हैं।
ये चुनौतियाँ आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय पहलुओं से जुड़ी हैं। युद्ध का प्रभाव लंबे समय तक रहने की आशंका है।
होर्मुज़ स्ट्रेट से भारत को कच्चा तेल, गैस और फ़र्टिलाइज़र मिलते हैं। युद्ध से यहाँ जहाज़ों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हुई है।
भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का रणनीतिक भंडार है। अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन भंडार बनाने पर काम जारी है।
भारत पेट्रोल में 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग कर रहा है, जिससे करोड़ों बैरल तेल आयात कम हुआ है। रेलवे विद्युतीकरण से डीज़ल की बचत हो रही है।
सरकार एक रणनीति के तहत काम कर रही है, स्टेकहोल्डर्स से चर्चा जारी है। एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी रोज़ समाधान पर काम कर रहा है।
प्रभावित देशों में मौजूद भारतीय मिशन 24 घंटे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। अब तक 3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटे हैं।
भारत सरकार संकट से निपटने के लिए क्या सही कदम उठा रही है?
भारत ने शुरू से ही शांति की अपील की है। होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों की आवाजाही में रुकावट अस्वीकार्य है।