
इस अद्भुत ग्रह का नाम L 98-59 d है। यह पृथ्वी से लगभग 35 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।
यहाँ का तापमान 1,900°C तक पहुँच जाता है। इतनी गर्मी में चट्टानें भी पिघल जाती हैं।
इसकी सतह पर हजारों किलोमीटर गहरा लावा (मैग्मा) का महासागर फैला है।
इस ग्रह की हवा में सड़े अंडों जैसी तीखी बदबू आती है। यह सल्फर गैसों के कारण है।
L 98-59 d का वायुमंडल हाइड्रोजन गैस से बहुत घना है। यह सांस लेने लायक नहीं है।
यह अनोखी खोज ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की। डॉ. हैरिसन निकोल्स टीम के लीड थे।
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के डेटा और कंप्यूटर मॉडल्स से इसकी आंतरिक संरचना समझी गई।
यहाँ जीवन की कोई उम्मीद नहीं है। तपती सतह और जहरीली गैसें इसे रहने योग्य नहीं बनातीं।
यह खोज दिखाती है कि ब्रह्मांड में ग्रहों की विविधता हमारी सोच से कहीं अधिक जटिल है।