
20 मार्च 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के आंकड़े को पार कर गया। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है।
भारतीय मुद्रा अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई, जिससे देश में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
डॉलर की मजबूती ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है।
इस गिरावट से आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं, और महंगाई आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही है।
अमेरिकी डॉलर की लगातार मजबूती और वैश्विक बाजार में उसकी बढ़ती मांग एक बड़ा कारण है।
वैश्विक बाजार में बढ़ती ब्याज दरें और आर्थिक अनिश्चितताएं भी रुपये पर दबाव बना रही हैं।
भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकासी भी इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
रुपये को सहारा देने और स्थिरता लाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हस्तक्षेप किया।
RBI ने रुपये को गिरने से रोकने के लिए बाजार में लगभग $100 अरब की बड़ी राशि झोंक दी।
RBI के इस कदम से बाजार में कुछ समय के लिए स्थिरता आने की उम्मीद है।
हालांकि, यह एक दीर्घकालिक समाधान नहीं है और विदेशी मुद्रा भंडार पर भी असर पड़ सकता है।
डॉलर की मजबूती केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता का विषय है।